• प्राचार्य ने संस्कृत को भारतीय संस्कृति, एकता और मूल्यों का आधार बताया

जालोर। राजकीय महाविद्यालय आहोर एवं राजकीय कन्या महाविद्यालय आहोर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को संस्कृत दिवस के अवसर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्कृत भाषा के महत्व, उसके गौरवशाली इतिहास तथा भारतीय संस्कृति में उसके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से छात्राओं के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजना के संबंध में भी छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम के दौरान राजकीय महाविद्यालय आहोर के प्राचार्य डॉ. गोपीकिशन चितारा ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि जीवन का सार है। संस्कृत भारतीय संस्कृति, उसकी एकता और मूल्यों की प्रमुख आधारशिला रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कारों, परंपराओं और विचारों का मूल स्रोत है।

डॉ. चितारा ने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन भाषा और संस्कृति से जोड़ना आवश्यक है। संस्कृत के अध्ययन से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत भाषा के प्रति रुचि विकसित करने तथा इसके संरक्षण और संवर्धन में योगदान देने का आह्वान किया।

छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति योजना महत्वपूर्ण पहल

कार्यक्रम में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना के संबंध में भी छात्राओं को विस्तार से जानकारी दी गई। प्राचार्य डॉ. चितारा ने कहा कि छात्राओं की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह योजना एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने महाविद्यालय की छात्राओं से अधिक से अधिक संख्या में योजना का लाभ उठाने की अपील की।

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असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिमा गहलोत ने संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन, समृद्ध और वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है। इसे देववाणी अथवा सुरभारती भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों में संस्कृत के प्रति रुचि पैदा करने के साथ-साथ इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि संस्कृत का गौरवशाली इतिहास ज्ञान, विज्ञान और भारतीय चिंतन परंपरा से जुड़ा हुआ है। नई पीढ़ी को संस्कृत की इस समृद्ध विरासत से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।

कॉलेज छात्राओं को दी छात्रवृत्ति की प्रक्रिया की जानकारी

कार्यक्रम के दौरान अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की रिसोर्स पर्सन रईश खान ने कॉलेज में अध्ययनरत छात्राओं को छात्रवृत्ति योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं को योजना की पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया के बारे में अवगत कराते हुए कहा कि जो छात्राएं इस योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति प्राप्त करना चाहती हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करें। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे योजना की जानकारी अपने स्तर पर अन्य पात्र छात्राओं तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक बालिकाएं उच्च शिक्षा के लिए मिलने वाली इस सहायता का लाभ उठा सकें। कार्यक्रम में महेंद्र कुमार सहित महाविद्यालय के अन्य स्टाफ सदस्य, छात्र-छात्राएं एवं छात्राएं उपस्थित रहीं। संस्कृत दिवस के आयोजन के साथ छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए उपलब्ध छात्रवृत्ति के अवसरों की जानकारी मिलने से कार्यक्रम उपयोगी एवं प्रेरणादायी रहा।