जालोर । रबी फसल बुवाई सीजन में उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध डायवर्जन एवं वितरण में अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। इसी क्रम में भीनमाल एवं सांचौर क्षेत्र में कृषि विभाग की टीम ने खाद-बीज विक्रेताओं के बिक्री परिसरों एवं गोदामों का सघन निरीक्षण कर उर्वरकों के स्टॉक की जांच की। निरीक्षण के दौरान विभिन्न विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों से उर्वरकों के तीन नमूने लिए गए तथा अनियमितताएं पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने एवं सेल स्टॉप की कार्रवाई भी की गई।

कृषि विस्तार के संयुक्त निदेशक डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में उर्वरकों की उपलब्धता, स्टॉक, वितरण व्यवस्था एवं रिकॉर्ड संधारण की नियमित जांच की जा रही है। जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं के बिक्री परिसरों एवं गोदामों का निरीक्षण कर रिपोर्ट राज एग्री क्यूसी मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन प्रस्तुत की जाएगी। निरीक्षण के दौरान स्टॉक, वितरण अथवा रिकॉर्ड में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कृषि विभाग ने किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी), यूरिया एवं विभिन्न ग्रेड के एनपीके उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी है। सहायक निदेशक कृषि शिवप्रकाश कुम्हार ने बताया कि एक बैग डीएपी के विकल्प के रूप में तीन बैग एसएसपी एवं एक बैग यूरिया के उपयोग का सुझाव दिया गया है। हालांकि, उर्वरकों की मात्रा का निर्धारण फसल की आवश्यकता एवं मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर किया जाना चाहिए। एसएसपी में 16 प्रतिशत फॉस्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है, जिसके कारण यह तिलहन फसलों के लिए भी उपयोगी है।

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वर्तमान में जिले में यूरिया 8,431 मैट्रिक टन, डीएपी 1,420 मैट्रिक टन, एनपीके 2,520 मैट्रिक टन तथा एसएसपी 713 मैट्रिक टन उपलब्ध है। किसानों की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारी लगातार निगरानी रख रहे हैं तथा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त उर्वरकों की मांग भी की जा रही है।

उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग पर रोक

जिले के समस्त उर्वरक विक्रेताओं, सहकारी समितियों, उर्वरक कंपनियों, निर्माताओं एवं कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा अन्य संबंधित हितधारकों को निर्देशित किया गया है कि यूरिया एवं डीएपी के साथ किसी अन्य उत्पाद की खरीद के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराए जाएंगे तथा बिक्री के दौरान कोई अनुचित शर्त नहीं लगाई जाएगी। कृषि विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर जमाखोरी, कालाबाजारी, यूरिया के अवैध डायवर्जन, उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग एवं अन्य अनियमितताओं में लिप्त पाए जाने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के सुसंगत प्रावधानों के तहत नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि कोई कंपनी, निर्माता, वितरक अथवा विक्रेता यूरिया या डीएपी के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करता है, तो इसकी सूचना नजदीकी सहायक कृषि अधिकारी अथवा कृषि पर्यवेक्षक को दें। शिकायत के साथ विक्रेता संस्था का नाम, स्थान, उपलब्ध बिल एवं अन्य संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने से जांच एवं कार्रवाई में सहायता मिलेगी।  भीनमाल क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान कृषि अधिकारी जया श्रीमाली एवं रोशन लाल बिजारणियां तथा सांचौर क्षेत्र में सहायक निदेशक कृषि मोतीलाल सैनी मौजूद रहे।