जालोर। कृषि विज्ञान केंद्र, केशवना में राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड, जयपुर के वित्तीय सहयोग से मसाला प्रसंस्करण, व्यवसाय एवं निर्यात विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों एवं कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मसालों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन तथा निर्यात की संभावनाओं के संबंध में तकनीकी एवं व्यावसायिक जानकारी प्रदान करना रहा।

 कार्यक्रम में जय जालोर एफपीओ, जालोर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अविनाश सक्सेना मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एम.एल. तेतरवाल ने की। कृषि अनुसंधान केंद्र, जालोर के सहायक आचार्य डॉ. सुरेश एन.वी. विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रशिक्षण का समन्वय नोडल अधिकारी डॉ. पवन पारीक ने किया तथा मंच संचालन बिरम सिंह गुर्जर ने किया।

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प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मसालों के प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन, विपणन एवं निर्यात संबंधी जानकारी दी गई। साथ ही मसाला आधारित कृषि उद्यमों की स्थापना, व्यवसाय प्रबंधन तथा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की गई।

 मुख्य अतिथि अविनाश सक्सेना ने कहा कि कृषक उत्पादक संगठन सामूहिक प्रयासों के माध्यम से किसानों के उत्पादों का प्रसंस्करण, ब्रांडिंग एवं प्रभावी विपणन कर उन्हें बेहतर मूल्य दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने किसानों को कृषि आधारित उद्यमिता अपनाने तथा बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने के लिए प्रेरित किया।

 डॉ. एम.एल. तेतरवाल ने कहा कि तकनीकी प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। वहीं, डॉ. पवन पारीक ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मसाला प्रसंस्करण, व्यवसाय प्रबंधन एवं निर्यात की व्यावहारिक जानकारी किसानों और एफपीओ को अपने व्यवसाय का विस्तार करने में सहायक सिद्ध होगी।

 कार्यक्रम में प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने, विपणन के उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए प्रयास करने हेतु प्रोत्साहित किया गया। अंत में अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।