- रानी लक्ष्मीबाई केंद्र के तहत प्रशिक्षण जारी
- बच्चियों को किक और ब्लॉक किक का कराया अभ्यास
जालोर. राजकीय महाविद्यालय आहोर में आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा, जयपुर की अनुपालना में संचालित रानी लक्ष्मीबाई केंद्र के तहत छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन शुक्रवार को छात्राओं को आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना तथा विपरीत परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा के लिए जागरूक करना है।
महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन केंद्र संयोजक प्रतिमा गहलोत के निर्देशन में किया जा रहा है। शुक्रवार को प्रशिक्षणकर्ता लूंगा देवी ने छात्राओं को लॉग मूवमेंट, किक, ब्लॉक किक तथा हेड मूवमेंट जैसी तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं को इन तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया, ताकि जरूरत पड़ने पर वे आत्मविश्वास के साथ अपनी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठा सकें। कार्यक्रम में नरेंद्र कुमार सोनी और गंगादेवी भी उपस्थित रहे।
आत्मरक्षा केवल तकनीक नहीं, आत्मविश्वास का माध्यम
बालिकाओं की आत्मसुरक्षा आज के समय में एक महत्वपूर्ण विषय है। छात्राओं को शिक्षा के साथ अपनी सुरक्षा, अधिकारों और व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति जागरूक होना भी जरूरी है। आत्मरक्षा प्रशिक्षण उन्हें न केवल शारीरिक रूप से सक्षम बनाता है, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में शांत रहकर सही निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।
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प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को यह समझना महत्वपूर्ण है कि आत्मरक्षा का उद्देश्य किसी से मुकाबला करना नहीं, बल्कि संभावित खतरे को पहचानना, उससे सुरक्षित दूरी बनाना और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं को बचाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचना है। इसके लिए आसपास के वातावरण के प्रति सतर्क रहना, संदिग्ध स्थिति को समय रहते पहचानना और जरूरत पड़ने पर मदद मांगना भी आत्मसुरक्षा का अहम हिस्सा है।
व्यक्तिगत सुरक्षा और सतर्कता की जानकारी भी जरूरी
बालिकाओं को सार्वजनिक स्थानों, कॉलेज परिसर, यात्रा के दौरान तथा अन्य परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के अनुचित व्यवहार या असहज महसूस कराने वाली गतिविधि को नजरअंदाज करने के बजाय विश्वसनीय शिक्षक, अभिभावक या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
इसी तरह छात्राओं को अपने अधिकारों और व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक है। उन्हें यह समझना चाहिए कि किसी भी अनुचित व्यवहार के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर सहायता मांगना उनका अधिकार है। आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से उनमें निर्भीक होकर अपनी बात रखने, खतरे की स्थिति में सतर्क रहने और समय पर सहायता प्राप्त करने की क्षमता विकसित की जा सकती है।
नियमित अभ्यास से बढ़ेगा आत्मविश्वास
रानी लक्ष्मीबाई केंद्र के तहत आयोजित यह प्रशिक्षण छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे कार्यक्रमों में नियमित अभ्यास के साथ सुरक्षा संबंधी जागरूकता, आपातकालीन परिस्थितियों में उचित प्रतिक्रिया और सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी देना भी जरूरी है। इससे छात्राएं कॉलेज और घर के बाहर की गतिविधियों में अधिक आत्मविश्वास के साथ भाग ले सकेंगी। महाविद्यालय में संचालित इस पहल से छात्राओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। आत्मरक्षा का ज्ञान उन्हें जागरूक, सतर्क और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक साबित हो सकता है।