जालोर की पूर्व विधायक अमृता मेघवाल व पति बाबूलाल के रिश्ते में क्यों पड़ी दरार, जानिए पूरी कहानी...
जालोर. जालोर की पूर्व विधायक अमृता मेघवाल के पारिवारिक विवादित मामले में नया मोड़ आ गया है। अमृता के पति बाबूलाल की ओर से करीब दो साल पहले लिये गए तलाक को न्यायालय ने एकतरफा मानते हुए तलाक की डिक्री निरस्त कर मूल प्रकरण को पुनः सुनवाई के लिए बहाल किया है। वहीं अमृता के पति बाबूलाल की ओर से तलाक लेने के बाद दूसरा विवाह भी कर लिया गया है।
टिकट कटने के बाद बिखरा दाम्पत्य रिश्ता
दरअसल, जालोर के रामदेव कॉलोनी निवासी बाबूलाल मेघवाल ने अमृता मेघवाल से वर्ष 2008 में सामाजिक रीति रिवाज से शादी की। बाबूलाल को राजनीति शौक होने से उन्होंने अमृता मेघवाल को जिला परिषद का चुनाव भी लड़वाया। इस कारण पार्टी में पहचान बन गई। मोदी लहर में बाबूलाल ने संगठन में पैठ कायम करते हुए कदावर नेता जोगेश्वर गर्ग की टिकट कटवाकर अपनी पत्नी अमृता मेघवाल को जालोर विधानसभा (एससी आरक्षित) सीट पर टिकट दिलवाने में कामयाब हो गए। न केवल टिकट दिलवाई बल्कि मोदी लहर में अमृता करीब 45 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल करने में भी सफल हुई। पांच साल बीजेपी की वसुंधरा सरकार में पति-पत्नी के बीच मधुर सम्बन्ध रहे और एक बेटी को भी जन्म दिया, लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में अमृता की पार्टी ने टिकट काटकर वापस जोगेश्वर गर्ग को उम्मीदवार बना दिया।
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इससे निराश पति-पत्नी दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाने लगे कि पांच साल में क्षेत्र में व्यवहार ठीक नहीं होने के कारण टिकट कटा। इससे दोनों के बीच अनबन भी बढ़ गई। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तो दोनों पति-पत्नी के बीच सम्बन्ध लगभग बिगड़ गए थे। चूंकि जयपुर में विधायक रहते अमृता मेघवाल ने जो फ्लैट लिया था, उसमें पति बाबूलाल की एंट्री भी बंद कर दी गई। इससे बाबूलाल भी नाराज रहने लगे। कुछ समय रिश्तेदारों ने दोनों को समझाने का प्रयास भी किया, लेकिन बात नहीं बन पाई। इस कारण वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले बाबूलाल ने तलाक की अर्जी न्यायालय में दाखिल कर दी। 7 जून 2023 को न्यायालय ने तलाक का निर्णय कर दिया।
सालभर बाद जालोर बंद घर में प्रवेश का किया था प्रयास
तलाक के करीब सालभर बाद वर्ष 2024 में अमृता मेघवाल ने जालोर रामदेव कॉलोनी में बाबूलाल मेघवाल के घर का ताला तोड़कर घर में घुसने का प्रयास किया, उस समय आपसी विवाद भी हुआ और परस्पर प्रकरण भी दर्ज हुआ। उसके बाद अमृता ने न्यायालय में याचिका दर्ज कर एकपक्षीय तलाक को चुनौती दी थी। जिसमें बताया कि तलाक के लिए उनके पति बाबूलाल ने जो नोटिस भेजे उसमें वो नहीं रहती थी और जिस अखबार में पत्र प्रकाशित करवाया, उसकी प्रसार संख्या राजस्थान में नाममात्र की है। इस कारण तलाक का पत्र उसे तामील भी नहीं हुआ। उसे धोखे में रखकर पुराने स्थान पर पत्र भेजे गए। जालोर पारिवारिक न्यायालय ने याचिका को स्वीकारते हुए 21 अगस्त 2026 को न्यायाधीश अमर वर्मा ने महत्वपूर्ण निर्णय किया कि
न्यायालय ने पूर्व में पारित एकपक्षीय (Ex-Parte) तलाक की डिक्री को निरस्त/रद्द करते हुए मामले में पूर्व में की गई एकपक्षीय कार्यवाही को भी समाप्त कर दिया है तथा मूल प्रकरण को पुनः सुनवाई के लिए बहाल कर दिया है। न्यायालय ने आदेश में यह माना है कि संबंधित पक्ष को नोटिस की समुचित एवं विधिसम्मत तामील नहीं हुई थी, जिसके कारण उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका। अब उक्त प्रकरण में दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए मामले का पुनः निर्णय किया जाएगा।