मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग का पलटवार, बोले- गहलोत अपने कार्यकाल में विधान परिषद क्यों नहीं करवा पाए

मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग का पलटवार, बोले- गहलोत अपने कार्यकाल में विधान परिषद क्यों नहीं करवा पाए

जालोर. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से जालोर दौरे के दौरान राजस्थान में विधान परिषद गठन की मांग उठाई। गहलोत के इस बयान के बाद राजस्थान विधानसभा में मुख्य सचेतक व जालोर विधायक जोगेश्वर गर्ग ने पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया है।

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मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने डीडीटी न्यूज से बातचीत करते हुए कहा कि जालोर धरती पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बयान दिया कि राजस्थान में विधान परिषद की आवश्यकता है, लेकिन तीन बार मुख्यमंत्री रहे, वे करवा सकते थे, एक बार तो उनकी केंद्र में भी उनकी यूपीए सरकार थी, सोनिया गांधी के नेतृत्व में मनमोहनसिंह प्रधानमंत्री थे, जहां तक मुझे पूरी जानकारी है कि आप करवा सकते थे, लेकिन आपके भेजे हुए प्रस्ताव को सोनिया गांधी के निर्देश पर मनमोहनसिंह ने निरस्त किया। जब उस स्थित में आप नहीं करवा पाए तो अब इस प्रकार की बात करना हास्यास्पद लगता है। ऐसा लगता है केवल आप राजनीति करने का प्रयास करते है, दूसरों के पाले में गेंद डालने का प्रयास करते हैं। आप चाहते तो राजस्थानी भाषा को मान्यता दिला सकते थे, लेकिन आपने ठोस प्रयास नहीं किए। जब आपके पास अधिकार था, उस समय आपने उपयोग नहीं किया, लेकिन अधिकार हाथ से निकल जाते है उसके बाद आप कहते है कि ऐसा होना चाहिए, यह हास्यास्पद लगता है।

2028 के बाद बदल सकता है राजनीतिक परिदृश्य

मुख्य सचेतक गर्ग ने सम्भावना जताई कि 2028 तक परिसीमन हो जाएगा। उसके बाद राजनीतिक परिदृश्य क्या होता है, उसके बाद संभवतया बात चलेगी, लेकिन मुख्य सचेतक होने के नाते इतना कह सकता हूँ कि वर्तमान विधानसभा भवन है, उसके नीचे के भवन में विधानसभा का काम चलता है, वहीं ऊपर जगह पर हमने भवन बना दिया है। वो विधान परिषद के लिए काम आ सकता है। यह काम होने के बाद हम केंद्र सरकार से हम निवेदन करेंगे कि हमारे पास व्यवस्था पूरी है, तब अनुमति मिले तो वो अलग बात है। आपको बता दें कि विधान परिषद सदस्य सीधे प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित नहीं होते, उनकी चयन की अलग अलग श्रेणी होती है, छह साल के कार्यकाल में विधान परिषद का सदस्य सरकार में शामिल हो सकता है। वर्तमान में देश में छह राज्यों में विधान परिषद का संचालन हो रहा है। बिहार के नीतीश कुमार व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर विधान परिषद का सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री रह चुके है।