टूटी सड़कें, गंदगी और जलभराव समेत कई समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने उम्मेदबाद पंचायत के आगे दिया धरना
- ग्राम विकास अधिकारी को हटाने और विकास कार्यों की जांच की मांग; महिलाओं, युवाओं और विद्यार्थियों समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने 5 घंटे तक किया धरना-प्रदर्शन, 15 दिन में जांच के आश्वासन पर समाप्त हुआ आंदोलन
जालोर. ग्राम पंचायत उम्मेदाबाद में वर्षों से लंबित जनसमस्याओं और कथित अनियमितताओं को लेकर गुरुवार को ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। पंचायत कार्यालय के बाहर करीब पांच घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन में महिलाओं, युवाओं, विद्यार्थियों और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने ग्राम विकास अधिकारी को हटाने, पंचायत में हुए विकास कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा सड़क, सफाई और जलनिकासी जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान करने की मांग उठाई।
धरने के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में करोड़ों रुपये के विकास कार्य होने के बावजूद आमजन को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जेजेएम योजना के तहत विभिन्न वार्डों में पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों को तोड़ दिया गया, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं करवाई गई। इसके चलते कई वार्डों में लोग टूटी सड़कों और गड्ढों से होकर गुजरने को मजबूर हैं।
धरने में शामिल जाकिर खान ने कहा कि सफाई व्यवस्था पर हर महीने बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद गांव में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। बरसात के दौरान नालियां जाम होने से गंदा पानी गलियों और घरों तक पहुंच जाता है। उन्होंने शीतलाई कैचमेंट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, मुख्य बाजार में शौचालय कॉम्प्लेक्स निर्माण और लंबित जनसमस्याओं के समाधान की मांग की।
सभा को संबोधित करते हुए सतीश शर्मा ने पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए विभिन्न विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।
धरने के दौरान महिलाओं ने नरेगा कार्य शुरू नहीं होने पर नाराजगी जताई, जबकि विद्यार्थियों ने जलभराव और कीचड़ से प्रभावित गलियों की समस्या को उठाया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि धरना चलने के दौरान भी ग्राम विकास अधिकारी कार्यालय से बाहर नहीं आए, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।
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बाद में सायला विकास अधिकारी रेशाराम सुंदेशा मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने ज्ञापन में शामिल सभी बिंदुओं की जांच करवाने तथा 15 दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रशासन के आश्वासन पर धरना समाप्त कर दिया गया। हालांकि ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इनका कहना है...
ज्ञापन में दर्ज सभी शिकायतों की जांच करवाई जाएगी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जनसमस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।"
- रेशाराम सुंदेशा, विकास अधिकारी, सायला