संयुक्त सचिव एवं केंद्रीय नोडल अधिकारी ने किया निरीक्षण : सायला में मोरिंगा, खजूर एवं अनार के बगीचों का किया अवलोकन, बावतरा में किनोवा प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण कर कृषि नवाचारों, चुनौतियों एवं मूल्य-संवर्धित उत्पादों पर की विस्तृत चर्चा
जालोर. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव एवं प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाय) के केंद्रीय नोडल अधिकारी देवेश देवल (आईएएस) जालोर के दो दिवसीय दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने सोमवार को जिला कलक्टर डॉ. प्रदीप के. गावंडे के साथ प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना से संबंधित विभागों की कलेक्ट्रट सभागार में समीक्षा बैठक ली, बैठक में कृषि, उद्यान राजस्व, ग्रामीण विकास, भू-संरक्षण, पशु पालन, डेयरी, सहकारिता, उद्योग, कृषि विपणन एवं बैकिंग सेक्टर से नाबार्ड अग्रणी बैंक जिला प्रबंधक, सहकारिता के जिला स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया।
संयुक्त सचिव देवेश देवल ने विभिन्न क्षेत्रों का सघन भ्रमण कर कृषि व उद्यानिकी गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जिले में आधुनिक खेती की तकनीक, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, प्राकृतिक खेती और कृषि प्रसंस्करण इकाइयों की प्रगति की समीक्षा की।
संयुक्त सचिव ने आधुनिक खेती, तकनीक एवं आय-लागत के अध्ययन भ्रमण के दौरान सायला ब्लॉक में प्रगतिशील किसान छैलसिंह राजपुरोहित एवं भीखाराम चौधरी के खेत का दौरा किया। यहाँ उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप व स्प्रिंकलर) संयंत्र की सहायता से विकसित मोरिंगा (सहजन), खजूर एवं अनार के बगीचों का अवलोकन किया। उन्होंने पारंपरिक फसलों की तुलना में उद्यानिकी फसलों से होने वाली आय और उत्पादन लागत के तुलनात्मक विवरण के बारें में जानकारी प्राप्त की।

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बैठक में भूजल के गिरते स्तर और खारे पानी की समस्या जैसी स्थानीय चुनौतियों पर चर्चा की गई। संयुक्त सचिव ने माना कि कम पानी और प्रतिकूल मौसम को सहने वाली खजूर व मोरिंगा जैसी फसलें इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो रही हैं। ड्रिप इरिगेशन, ऑटोमेशन और सोलर पंप जैसी तकनीकों के प्रयोग से जिले में बागवानी के रकबे में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस दौरान रसायनों के उपयोग को घटाकर जैविक व प्राकृतिक खादों के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और लागत कम करने के तरीकों पर किसानों से संवाद किया गया।
केंद्रीय नोडल अधिकारी ने बावतरा गांव में रमेशसिंह द्वारा स्थापित किनोवा प्रोसेसिंग यूनिट का भ्रमण भी किया। उन्होंने यूनिट में किनोवा की सफाई, डि-सैपोनिन (कड़वाहट हटाना), ग्रेडिंग और पैकेजिंग की पूरी प्रक्रिया को बारीकी से समझा। स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को उपज के लाभकारी मूल्य मिल रहे हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में किनोवा बुवाई के क्षेत्रफल का तेजी से विस्तार हुआ है।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने किनोवा से बनने वाले उत्पादों (जैसे किनोवा आटा, फ्लेक्स, दलिया व पौष्टिक स्नैक्स) तथा खजूर से तैयार होने वाले उत्पादों (जैसे- ड्राय डेट्स, खजूर सिरप और खजूर पाउडर) के निर्माण व बाजार मांग पर विस्तृत जानकारी ली। संयुक्त सचिव ने जिले में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय की सराहना की। इस दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेंद्र सिंह चांदावत, कृषि विस्तार के संयुक्त निदेशक डॉ. खुमान सिंह रूपावत, उद्यान विभाग के उप निदेशक एल. एन. यादव, कृषि विस्तार के सहायक निदेशक सागरमल कुमावत, उद्यान विभाग के सहायक निदेशक डॉ. जोगेंद्र सिंह, सांख्यिकी अधिकारी एवं पीएमडीडीके वाय प्रभारी विष्णु कुमार, कृषि अधिकारी चौथू राम हाकला, भूराराम मीणा सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।