यतीश कुमार का साहित्य के प्रति आपार लगाव देश में हिंदी साहित्यिक की प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है

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DDT Team Verified Media or Organization • 01 Aug, 2026 Chief Editor
Nov 16, 2022 • 1:51 PM  0
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यतीश कुमार का साहित्य के प्रति आपार लगाव देश में हिंदी साहित्यिक की प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है
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16 Nov 2022
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यतीश कुमार का साहित्य के प्रति आपार लगाव देश में हिंदी साहित्यिक की प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है
यतीश कुमार का साहित्य के प्रति आपार लगाव देश में हिंदी साहित्यिक की प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है

Kolkata: देश की सुप्रसिद्ध कंपनी ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक यतीश कुमार की एक और पहचान एक अनुभवी कवि, लेखक और साहित्यकार के रूप में है। जो देश के साहित्य जगत में काफी चर्चित नाम माना जाता है। श्री कुमार ने हिंदी कविता और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए गत वर्ष कोलकाता में तीन दिवसीय 'लिटरेरिया 2021' का आयोजन किया था। जिसमें देशभर से 50 से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया था। इस आयोजन की आपार सफलता के कारण 18-20 नवंबर 2022 को एक बार फिर कोलकाता में हिंदी साहित्य के परिदृश्य 'लिटरेरिया 2022' के सफल आयोजन की तैयारी की जा रही है, जिसकी तैयारियां जोरों पर है।

श्री यतीश कुमार ने इस आयोजन के दूसरे संस्करण में यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं कि इस आयोजन में देशभर के हिंदी कवि और साहित्यकारों के अलावा क्षेत्रीय साहित्यकारों को भी उचित स्थान मिले। कोलकाता की सुप्रसिद्ध साहित्यिक संस्था नीलांबर के तत्वावधान में तीन दिवसीय इस लिटफेस्ट में साहित्यकारों ने नवीनतम साहित्यिक प्रयासों को प्रस्तुत करेंगे। 18 नवंबर 2022 को इस कार्यक्रम का सफल उद्घाटन किया जाएगा। इस समारोह में नीलांबर 'सप्तपर्णी' की एक त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका का औपचारिक विमोचन किया जाएगा, जिसमें देशभर के हिंदी साहित्य के दिग्गज कवि, साहित्यकार और लेखक शामिल होंगे।

“इस खास मौके पर विभिन्न साहित्यिक-सामाजिक संगठनों से सक्रिय रूप से जुड़े यतीश कुमार ने कहा, अब समाज में एक नया हिंदी साहित्यिक का इको-सिस्टम बन रहा है। अगर इसपर ध्यान आकर्षित किया जाए तो हम पाएंगे कि हाल के वर्षों में हिंदी साहित्य का परिदृश्य इस देश के विभिन्न इलाकों और छोटे शहरों में काफी बढ़ा है और विभिन्न जगहों से आने वाले युवा कवियों और लेखकों का अवदान काफी उत्साहपूर्ण रहा है। विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रम उनके कार्यों को उजागर करने के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान कर रहे हैं, इनके नए विचारों ने नई पीढ़ी के दृष्टिकोणों को काफी प्रभावित और समृद्ध किया है।

श्री कुमार ने पिछले कुछ वर्षों में साहित्य जगत में अपनी विशेष रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई है। लोकप्रिय उपन्यासों, कहानियों और यात्रा वृत्तांतों पर उनकी काव्य समीक्षाओं ने पाठकों का विशेष ध्यान खींचा है। उनकी कविताएँ और संस्मरण अधिकांश प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं।

काव्यात्मक हृदय के साथ कुशल पेशेवर यतीश कुमार भारत में किसी भी संस्थान में अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) नियुक्त होने वाले सबसे कम उम्र के अधिकारी भी हैं। 21 अगस्त 1976 (मुंगेर, बिहार) में जन्मे यतीश कुमार ने कविता और साहित्य की यात्रा में अपनी विशिष्ट शैली विकसित की है। 1996 बैच के इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ़ मैकेनिकल इंजीनियर्स (आईआरएसएमई) के अधिकारी श्री यतीश कुमार को भारतीय रेलवे सेवा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 2006 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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श्री कुमार की कविताओं के संकलन 'अंतस की खुरचन' को साहित्यिक जगत में अपने नए दृष्टिकोण और नवीनता के लिए काफी सराहना और प्रशंसा मिली है। श्री यतीश कुमार प्रतिष्ठित साहित्यिक संगठन 'नीलांबर' के अध्यक्ष हैं। इसके जरिए पिछले 20 वर्षों से वह कोलकाता में कई मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

श्री यतीश कुमार की कविताएँ और संस्मरण बड़े पैमाने पर प्रमुख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। हिंदवी, समालोचन, जानकी पुल, पहली बार और कविता कोष जैसे लोकप्रिय साहित्यिक रचनाएं ब्लॉगों पर भी उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय और पांच क्षेत्रीय रेलवे पुरस्कारों के अलावा यतीश कुमार को आर्थिक अध्ययन संस्थान से 'उत्कृष्ट वैश्विक नेतृत्व पुरस्कार-2019' प्राप्त हुआ है। इसके अलावा वर्ल्ड एचआरडी कांग्रेस द्वारा 'सीईओ विद एचआर ओरिएंटेशन' अवार्ड और गवर्नेंस में 'सीएमडी लीडरशिप अवार्ड' और 2021 में 8वां पीएसयू अवार्ड से भी उन्हें नवाजा गया है।

यतीश कुमार विभिन्न सामाजिक उत्थान से जुड़े कार्यक्रमों का समर्थन करने में हमेशा पहली पंक्ति में खड़े होते हैं। उन्होंने देशभर में हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इससे जुड़े बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण में मदद करने के लिए विभिन्न कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) पहल भी शुरूआत की हैं।

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