सर्व हिन्दू समाज के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर कहा - श्मशान भूमि निरस्त कर अन्य उपयोगार्थ आवंटन करना न्याय संगत नहीं 

सर्व हिन्दू समाज के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर कहा - श्मशान भूमि निरस्त कर अन्य उपयोगार्थ आवंटन करना न्याय संगत नहीं 

जालोर. सर्व हिन्दू समाज के एक प्रतिनिधि मंडल ने आक्रोश व्यक्त करते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जालोर के रणछोड़ नगर में चक नम्बर-3 खसरा संख्या 2225/6287 खसरा एवं संख्या 6467/6287 हेक्टर रकबा क्रमशः 1.3 हेक्टर एवं रकबा 0.1600 हेक्टर श्मशान भूमि को निरस्त कर अन्य प्रयोजनार्थ उपयोग नहीं करवाने के आदेश सम्बन्धित अधिकारियों को देने का आग्रह किया है। तथा न्याय संगत आदेश पारित कर हिन्दू समाज पर किये जा रहे राजनैतिक, या अन्य दबावों के अन्याय पर रोक लगावे। यदि न्याय संगत कार्यवाही नहीं की गई, तो अन्याय पूर्ण आदेश के विरूद्ध हिन्दू समाज जो आन्दोलन करेगा उसके लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा। प्रतिनिधि मंडल में बंशीलाल सोनी, शंकर सिंह बगेडिया, सत्य प्रकाश रामावत, धनराज दवे, दिनेश जीनगर, दलपत सिंह आर्य, पूर्व पार्षद प्रेम सिंह चंपावत, पुखसिंह भाटी, नारायण सिंह राजपुरोहित, मोहनलाल गुर्जर, सुरेश सुथार मिस्त्री, मधुर श्याम गुप्ता, दलपत बोहरा,जूठाराम सौलंकी, मुकेश कुमार तंवर, व मुकेश वैष्णव शामिल थे। ज्ञापन में लिखा है कि वर्णित भूमि रिकोडेर्ड श्मशान भूमि आरक्षित है। और किसी जाति विशेष की नहीं है। सार्वजनिक उपयोगार्थ है। इसलिए किसी एक या दो जाति के आवेदन पर श्मशान भूमि निरस्त कर अन्य उपयोगार्थ आवंटन करना न्याय संगत नहीं है। हिंदू समाज के छतीस कौम का अनुरोध है कि इस भूमि का उपयोग सिर्फ श्मशान भूमि के लिए ही उपयोग हुआ है और भविष्य में भी होगा।कुछ व्यक्ति विशेष छतीस कौम में से मात्र एक कौम का है। जिसके निवेदन पर या मात्र उनको श्मशान भूमि आवंटन होने से 35 कौम का हक नहीं मारा जा सकता।और ये भूमि 35 कौम की सार्वजनिक श्मशान भूमि है ना कि किसी एक जाति विशेष की है। इस पर स्थगन आदेश लगने से पूर्व से ये दाह संस्कार के उपयोग में लगातार रही है।

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इसी प्रकार न्यायालय का स्थगन आदेश होने के बाद न्यायालय की आदेशों की पालना के लिए अन्तिम संस्कार नहीं किया जा सका। मात्र इस कारण से इस भूमि को अन्य उपयोगार्थ आवंटन करना न्याय संगत नहीं है। ज्ञापन में बताया गया है कि नगर परिषद से इस भूमि का कोई लेना देना नहीं है। इसलिए नगर परिषद की इस भूमि के लिए की गई टिप्पणी गलत व अमान्य है।अगर किसी सरकारी प्रयोगार्थ इस भूमि को एक्वायर किया जाता है तो इसके बदले सार्वजनिक श्मशान भूमि को आस पास दूसरी भूमि आवंटित कर ही एक्वायर करना न्यायोचित है।