बागरा में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन, “हिंदू जगे तो विश्व जगेगा” का दिया संदेश
- भव्य शोभायात्रा से हुआ सम्मेलन का शुभारंभ
देवेन्द्रराज सुथार / बागरा. कस्बे में रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और भव्यता के साथ किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ प्रातः 11 बजे बस स्टैंड स्थित बाबा रामदेव मंदिर प्रांगण से निकाली गई भव्य शोभायात्रा से हुआ।

शोभायात्रा पोस्ट ऑफिस गली, उगमणावास, घांचियों का चोहटा, विश्वकर्मा कॉलोनी सहित प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सम्मेलन स्थल पर पहुंचकर संपन्न हुई। शोभायात्रा में सजे-धजे ऊंट, आकर्षक धार्मिक झांकियां, साधु-संतों के रथ, डीजे पर गूंजते सनातनी गीत और अनुशासित रूप से चलती बालिका वाहिनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। हाथों में तलवार लिए बालिका वाहिनी ने नारी शक्ति, आत्मरक्षा और संस्कारों का सशक्त संदेश दिया। ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माता की जय’ के जयघोषों से पूरा कस्बा धर्म और राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
जाति-पाति की संकीर्णता से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में चिंतन की आवश्यकता – महंत रामपुरी
सम्मेलन को संबोधित करते हुए रामदेव मठ नून के महंत रामपुरी ने कहा कि वर्तमान समय हिंदू समाज के लिए आत्ममंथन का है। उन्होंने कहा कि जाति-पाति, ऊंच-नीच और आपसी द्वेष की संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में एकजुट होकर कार्य करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन पर जोर देते हुए कहा कि व्यक्ति निर्माण की पहली पाठशाला परिवार होता है। थॉमस अल्वा एडिसन के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि माता-पिता और परिवार का मार्गदर्शन ही समाज को सही दिशा देता है।

महंत रामपुरी ने हिंदू समाज से वेदों और सनातन ग्रंथों की ओर लौटने का आह्वान करते हुए कहा कि आज का समाज सोशल मीडिया, रील्स और इंस्टाग्राम की आभासी दुनिया में उलझकर अपने मूल संस्कारों से दूर होता जा रहा है। यदि समाज वेद-पुराणों से विमुख रहा तो सामाजिक विकृतियां और नैतिक पतन लगातार बढ़ते जाएंगे।

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उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह समय विरोधियों पर प्रहार करने का नहीं, बल्कि हिंदू समाज को अपने भीतर झांकने और स्वयं को सुदृढ़ करने का है। इतिहास साक्षी है कि अनेक आक्रांताओं और संकटों के बावजूद सनातन धर्म की चेतना को कोई समाप्त नहीं कर सका।
सुविधाओं के बीच शांति का अभाव जीवन की त्रासदी – साध्वी दर्शितागुणा

सम्मेलन में जैन समाज की साध्वी दर्शितागुणा ने आधुनिक जीवनशैली पर गहन विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति के पास सभी भौतिक सुविधाएं होने के बावजूद मन में शांति नहीं है, तो यह जीवन की फैंटेसी नहीं बल्कि एक बड़ी ट्रेजडी है। उन्होंने एकाकी जीवन, पारिवारिक मूल्यों के ह्रास और नैतिक पतन की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि सुविधाओं और विलासिता की अति ने व्यक्ति के भीतर अवगुणों को जन्म दिया है। फैंटेसी की अंधी दौड़ में व्यक्ति स्वयं अपनी मानसिक और सामाजिक दुर्दशा का कारण बन रहा है।
संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में हो रहे हैं विराट हिंदू सम्मेलन – प्रचारक अनिल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक अनिल ने विराट हिंदू सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में इस प्रकार के सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने संघ के 'पंच-परिवर्तन' की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि संघ समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्यों के बोध पर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब हिंदू समाज जागृत, संगठित और संस्कारवान बनेगा, तभी “हिंदू जगे तो विश्व जगेगा” का संकल्प साकार होगा।
साधु-संतों के सानिध्य में उमड़ा सनातनियों का सैलाब

विराट हिंदू सम्मेलन में जागनाथ मठ के महंत महेंद्र भारती, भैरवधाम मठ के महंत योगीराज विक्रमनाथ के शिष्य महेशनाथ, सारणेश्वर मठ सांथू के महंत रणछोड़पुरी सहित अनेक संत-महात्माओं का सानिध्य प्राप्त हुआ। बागरा सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में सनातनी धर्मप्रेमी सम्मेलन में शामिल हुए। साधु-संतों, वक्ताओं और श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता से यह आयोजन धार्मिक चेतना, सामाजिक एकता और संगठन शक्ति का प्रभावशाली उदाहरण बनकर सामने आया।