मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का लाभ उठा रहे जिले के किसान, उर्वरकों की सही मात्रा के इस्तेमाल से बढ़ाई पैदावार
जालोर. जिले के जालमपुरा और खेतलावास के प्रगतिशील किसानों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को अपनाकर खेती को न केवल वैज्ञानिक बनाया है, बल्कि अपनी लागत कम कर मुनाफे में भी बढ़ोतरी की है जालोर जिले के किसान मांगाराम जी कलबी (निवासी जालमपुरा) पहले, अपने खेतों में उर्वरकों का असंतुलित उपयोग कर रहे थे, जिससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही थी। कृषि विभाग के अधिकारियों के सहयोग से उन्होंने मिट्टी का परीक्षण करवाया और मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्राप्त किया।

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मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुसार खाद और जैविक खादों के संतुलित उपयोग से उर्वरक की लागत में कमी आई। उनकी अनार सहित अन्य की फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार हुआ। अब वे गांव के अन्य किसानों को भी मृदा स्वास्थ्य जांच करवाने लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी प्रकार जिले खेतलावास के रहने वाले युवा किसान श्रवण कुमार ने भी अपनी जमीन की सेहत जानने के लिए योजना का लाभ उठाते हुए मिट्टी की जांच करवाई। मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, जिंक आदि की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अनावश्यक रसायनों का उपयोग बंद कर दिया। इससे उर्वरकों पर होने वाला फालतू खर्च बचा और मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनी रही, जिससे लंबे समय के लिए खेती टिकाऊ बनी।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड के मुख्य लाभ
संतुलित उपयोग - सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का पता लगाकर केवल आवश्यक खाद का उपयोग। साथ ही उर्वरकों के अनावश्यक व्यय में लगभग 8-10% की बचत के साथ ही उचित पोषण मिलने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार होता है।