पिछली सरकारों ने आस्था का अनादर किया, रूढ़िवादी मानती थी, वरना राममंदिर पहले बन जाता- योगी आदित्यनाथ
- सिरे मंदिर स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर की 375 वीं वर्षगांठ पर महायज्ञ और धर्मशाभा का आयोजन
जालोर. जालोर में सिरे मंदिर में रत्नेश्वर महादेव मंदिर की 375वीं वर्षगांठ के अवसर पर सोमवार को गोरक्ष धाम गोरखपुर के मठाधीश एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भैरवनाथ अखाड़े के महंत पीर गंगानाथ महाराज की पावन उपस्थिति में महायज्ञ और धर्मसभा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में आहुति देकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की गई।

धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकारों ने आस्था का अनादर किया, वे इसे अंधविश्वास मानती थी, वरना राममंदिर पहले ही बन जाता, लेकिन मोदीजी ने सनातन की आस्था को भारत की आस्था माना। योगी ने कहा कि जातियां समाज को व्यवस्थित रूप से संचालित करने का माध्यम हैं, लेकिन जातिवाद उस व्यवस्था को विकृत कर देता है।

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भारत में जन्म लेना दुर्लभ है और मनुष्य के रूप में जन्म लेना उससे भी अधिक दुर्लभ है। दुनिया में करीब 200 देश हैं, लेकिन भारत जैसा देश कहीं नहीं है। योगी ने सिरे मंदिर की बारीक कारीगरी को अद्भुत बताते हुए कहा कि महाराजा मानसिंह ने शिलालेखों के माध्यम से यहां के इतिहास को सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने सिरे मंदिर की कारीगरी को दुर्लभ और अद्भुत बताया। इसे देश दुनिया देखने आती है। यह कला अद्भुत है और ईश्वर की देन है। जोधपुर के महाराजा नरेश मानसिंह ने शिलालेखों पर इतिहास को सहेजा है। उस समय मानसिंह ने 3 लाख 51 हजार रुपए खर्च किए थे, जो आज के समय में करोड़ों रुपए के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि जौहर राजस्थान की परंपरा का तेज है, जिसने वीरांगनाओं के आत्मसम्मान और बलिदान की गौरवगाथा को अमर किया। जालोर में भी अलाउद्दीन खिलजी के समय और उसके बाद भी जौहर की परंपरा देखने को मिली है। यह परंपरा वीरों और वीरांगनाओं के बलिदान से बनी है। धर्म समाज को जोड़ने का माध्यम होना चाहिए। जातियां समाज को व्यवस्थित रूप से संचालित करने का माध्यम हैं, लेकिन जातिवाद उस व्यवस्था को विकृत कर देता है।

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इस अवसर पर श्री जालंधर नाथ जी की धन्य धरा पर अति प्राचीन श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर के 375 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में दो दिवसीय महायज्ञ एवं विशाल धर्म सभा में भेरुनाथ जी अखाड़े के महंत पीर गंगानाथ महाराज, गोरक्ष पीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज, श्री बाबा मस्तनाथ पीठाधीश्वर एवं तिजारा के विधायक योगी बालकनाथ महाराज, फतेहपुर सीकर के अमृत नाथ जी का आश्रम के महंत योगी नरहरि नाथ महाराज, पिपलिया कला के संतोष नाथ जी का धुणा के महंत एवं नाथ संप्रदाय के पूर्व राजा योगी संध्यानाथ महाराज, पलासनी चिड़िया नाथ जी का आसन के महंत योगी डॉक्टर गिरवरनाथ महाराज, गोगामेड़ी हनुमानगढ़ के श्री गुरु गोरखनाथ जी का टिल्ला के महंत योगी रूपनाथ महाराज, जोगीढाणा हरियाणा के महंत योगी केशवनाथ महाराज, करड़ा भीनमाल के महंत योगी काशीनाथ महाराज, भतृहरि गुफा उज्जैन मध्य प्रदेश के महंत रामनाथ महाराज, नोहर हनुमानगढ़ के अमरनाथ जी का मठ के महंत योगी पंचम नाथ महाराज, हरियाणा सिरसा में स्थित सरसई नाथ जी का मठ के महंत योगी सुंदरईनाथ महाराज, भीडभंजन महादेव जेतपुर गुजरात के महंत योगी कमलनाथ, जस्सानाथ जी का आश्रम रास ब्यावर के महंत नारायणनाथ महाराज, ओगड़नाथ जी का मठ सुराणा जालोर के महंत मंगलाईनाथ महाराज, योगी विक्रमनाथ महाराज, योगी आनंदनाथ महाराज, योगी ईश्वर नाथ, योगी, रामेश्वरनाथ, योगी रेवती नाथ, योगी शेरनाथ, योगी गोपालनाथ, योगी निर्भयनाथ, राजस्थान विधानसभा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग समेत कई साधु संत उपस्थित थे। कार्यक्रम संचालन व्यवस्थापक पारसमल परमार और नरपत आर्य ने किया। साथ ही पारसमल परमार ने सिरे मंदिर में गुरु परम्परा की पूरी जानकारी दी। मंदिर समिति और शहर व ग्रामीण लोगों की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया गया।
सिरे मंदिर के बंदरों ने सिखाया जीवन का सच

योगी ने कहा कि मंदिर में आते समय उन्हें बताया गया कि यहां बंदर चौक है। बड़ी संख्या में बंदर वहां आ गए थे। हम देखते हैं कि बंदर छीना-झपटी करते हैं, लेकिन यहाँ के बंदरों पर भी आध्यत्मिकता का प्रभाव है। हमने एक बंदर को रोटी दी, उसे दूसरी दे रहे थे, लेकिन उसने दूसरी नहीं ली। जब तक उसने पहली खा नहीं ली। अगर मनुष्य भी अपने जीवन में हड़पने और संचय करने की बजाय, जिसके पास नहीं है उसके पास पहुंचाने का भाव रख ले तो अशांति का भाव दूर किया जा सकता है। अराजकता को दूर किया जा सकता है।
नशे और स्मार्टफोन से दूर रहने की सलाह
योगी ने कहा कि योग करें, व्यायाम करें। इससे जीवन व्यवस्थित होगा और आगे बढ़ेगा। स्मार्टफोन से समय भी खराब होता है और आंखें भी खराब होती हैं। इससे सोचने की शक्ति भी कमजोर होती है। लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं और गेम बच्चों के जीवन को बर्बाद कर रहे हैं।

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नशा और स्मार्टफोन से दूर रहने की जरूरत है। स्मार्टफोन का सीमित उपयोग करें, परिवार को समय दें, और पूजा तथा भोजन के समय फोन को दूर रखें। फ्री होने के बाद कॉल कर लें।
सिरे मंदिर की राह अब हुई आसान

जालोर शहर से सिरे मंदिर तक पैदल पहुंचने में करीब एक घंटा लगता है। पहले पीर शांतिनाथ महाराज और अब गंगानाथ महाराज ने यहां तक आने के लिए अच्छा मार्ग बनवा दिया है, जिससे अब यहां पहुंचना आसान हो गया है। करीब 15 साल पहले प्राण प्रतिष्ठा के समय उन्हें यहां आने का मौका मिला था, तब रास्ता सकरा और कठिन था। उन्होंने कहा कि यहां का आध्यात्मिक प्रभाव अलग ही है, हजारों लोग एकत्रित होकर बिना भय के शिष्यभाव में डूबे हुए हैं और पूरा वातावरण आध्यात्मिक भाव से भरा हुआ है।
भारत के पास एक लंबी विरासत और समृद्ध परंपरा
योगी ने कहा कि दुनिया में कोई व्यक्ति जन्म कहीं भी ले सकता है, लेकिन ऋषियों, मुनियों, संतों और योगेश्वरों की परंपरा से जुड़ने का अवसर हर जगह नहीं मिलता। भारत के पास एक लंबी विरासत और समृद्ध परंपरा है।

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सनातन परंपरा में व्यक्ति किसी न किसी ऋषि के साथ अपने गोत्र को जोड़ता है और किसी परंपरा से जुड़कर उसी में रच-बस जाता है, जिससे परिवार और अपनत्व का भाव दिखाई देता है। ऐसा केवल भारत में ही संभव है। इसी भाव के कारण ईश्वर भी दुनिया में कहीं और अवतार नहीं लेते, बल्कि भारत में ही अवतरित होते हैं।
राम मंदिर निर्माण और राजस्थान की वीरभूमि का उल्लेख
योगी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 1947, 48, 49 और 50 के समय भी हो सकता था, लेकिन उस समय ऐसा नहीं हुआ और सरकारें इसके उलट तर्क देती रहीं। कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट में यह तक कहते थे कि राम हुए ही नहीं और कृष्ण हुए ही नहीं।

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योगी ने कहा कि हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम का अपमान करने वालों को जनता ने भी जवाब दिया। आज अयोध्या धाम में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है। जब 145 करोड़ लोग एक स्वर में बोलते हैं तो 500 साल पुरानी समस्या का भी समाधान हो जाता है और आगे भी एकजुट होकर कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। राजस्थान वीर भूमि है, जिसने सैकड़ों वर्षों तक देश की आजादी और मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान दिया है और आज भी यहां के युवा भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती होकर देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।