हाल-ए-जिला अस्पताल : खिड़कियों के काच टूटे हुए, बाथरूम गंदे, मुख्य गेट के बाहर कंटीली झाड़ियां

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DDT Team Verified Media or Organization • 01 Aug, 2026 Chief Editor
May 29, 2026 • 5:42 PM  0
स्वास्थ्य
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हाल-ए-जिला अस्पताल : खिड़कियों के काच टूटे हुए, बाथरूम गंदे, मुख्य गेट के बाहर कंटीली झाड़ियां
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29 May 2026
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हाल-ए-जिला अस्पताल : खिड़कियों के काच टूटे हुए, बाथरूम गंदे, मुख्य गेट के बाहर कंटीली झाड़ियां
  • अस्पताल में मॉनिटरिंग का अभाव,  कई जगह गुटखे थूके हुए हैं

दिलीपसिंह बालावत @जालोर. कहने को जिला मुख्यालय का अस्पताल है और बड़ी संख्या में मरीज अपना इलाज कराने यहाँ आते हैं, दिनभर मरीजों की भीड़ रहती है, लेकिन कई बार अस्पताल के हालात देखकर लगता है कि अस्पताल खुद बीमार है या फिर मरीज और उनके साथ आने वालों को भो बीमार कर देगा। यह हम नहीं कह रहे हैं  बल्कि अस्पताल के खुद हाल बया कर रहे हैं।

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अस्पताल में नाम मात्र की सफाई हो रही है सफाई के नाम पर झाड़ू लग जाता है और इसके बाद पोछा। लेकिन यह केवल वार्ड, और कमरों तक ही सीमित रहता है जबकि बाथरूम और दीवारों के कोने गंदगी से भरे पड़े हैं जगह जगह गुटखा खाकर थूका हुआ है जो बीमारी को न्योता देता है। इतना ही नहीं अस्पताल में कई ऐसी जगह है जहां पर झाड़ू लगे हुए महीनों हुए होंगे,  मोनिटरिंग के अभाव में सफाईकर्मी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

खिड़कियों के काच टूटे हुए, कबूतर प्रवेश करते हैं

आईसीयू वार्ड के पास स्थित गैलरी में जो खिड़कियां लगी हुई है वो पूरी तरह से टूटी हुई है और उन पर लगे कांच भी टूटे हुए हैं ऐसे में उस खुली जगह से कबूतरों का प्रवेश आसानी से हो जाता है। आईसीयू वार्ड के पास बाथरूम से बदबू आती है चलना मुश्किल हो जाता है।

अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर दीवार से सटी हुई है कंटीली झाड़ियां

अस्पताल में अपने निजी वाहन से भर्ती होने आने वालों के लिए एक दिक्कत यह भी है कि वाहन पार्किंग की समस्या रहती है, क्योंकि परिसर में एम्बुलेंस और डॉक्टर के वाहन खड़े रहते हैं ऐसे निजी वाहन चालकों को कई दूर खड़ा करना पड़ता है, वही मुख्य गेट के बाहर कंटीली झाड़ियों ने आम रास्ते को बंद सा कर रखा है और झाड़ियो की वजह से लोग वहा कचरा भी फेंकते हैं ऐसे में अस्पताल के बाहर गंदगी पसरी रहती है जो बीमारी को बुलावा देती है। ऐसे में वहा से इन झाड़ियों को काटा जाए तो पैदल चलने वालों को राहत मिल सकेगी और गंदगी भी नहीं होगी।

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अस्पताल प्रशासन के अनुसार अगर कोई भामाशाह टॉयलेट, बाथरूम आदि बनाने के लिए आगे आते हैं और फिर उनके मेंटिनेंस का जिम्मा भी लेते हैं तो अस्पताल प्रशासन उनके नाम का बोर्ड भी लगाएगा। हालांकि बाथरूम, टॉयलेट नए बनाने एवं इसके मेंटीनेंस का जिम्मा देने से पहले एक बार राज्य सरकार से अनुमति के बाद किया जाएगा। 

इनका कहना है...

अस्पताल की बिल्डिंग 50 साल पुरानी हो चुकी है, ऐसे में सेंट्रल सीवरेज सिस्टम पुराने जमाने का है।, ऐसे में इसको रिनोवेशन मिल जाए तो आमजन को सुविधा मिल जाएगी। एसटीपी प्लान के तहत एक पत्र मै लिख चुका हूं कि सेंट्रल सिस्टम को ठीक करवाया जाए। साथ ही टॉयलेट और बाथरूम के लिए कोई भामाशाह तैयार हो जाए तो कायापलट जाए। 

  • वेद प्रकाश मीणा, पीएमओ जिला अस्पताल जालोर

पैसे की कोई कमी नहीं हैऔर व्यवस्थाओं की कमी के कारण जनता को कोई समस्या आ रही है तो शीघ्र दूर करेंगे।

  • जोगेश्वर गर्ग, विधायक जालोर, मुख्य सचेतक राजस्थान सरकार

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