रबी सीजन में उर्वरक कालाबाजारी एवं जमाखोरी रोकने के लिए जिले में सघन निरीक्षण अभियान
- पॉस मशीन के स्टॉक का भौतिक सत्यापन, राज एग्री क्यू.सी. एप से किया ऑनलाइन निरीक्षण
जालोर । रबी सीजन 2025-26 के दृष्टिगत जिले में उर्वरकों की सुचारू एवं पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा कालाबाजारी, जमाखोरी और टैगिंग की रोकथाम के लिए कृषि विभाग द्वारा आदान विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का सघन निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत पॉस मशीन में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक स्टॉक से मिलान करने के साथ राज एग्री क्यू.सी. एप के माध्यम से ऑनलाइन निरीक्षण किया गया।
अभियान के तहत बागोड़ा क्षेत्र में संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. मुकेश शर्मा, सहायक निदेशक कृषि सागरमल कुमावत एवं सहायक प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार द्वारा निरीक्षण किया गया। सायला एवं जीवाणा क्षेत्र में कृषि अधिकारी जया श्रीमाली, भीनमाल एवं रानीवाड़ा क्षेत्र में सहायक निदेशक कृषि मोतीलाल सैनी एवं कृषि अधिकारी रोशन कुमार बिजारणियां तथा आहोर एवं भाद्राजून क्षेत्र में कृषि अधिकारी (उद्यान) रामेश्वर लाल बलाई ने निरीक्षण किया।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान पॉस मशीन में दर्शाए गए स्टॉक एवं भौतिक स्टॉक का मिलान, पॉस मशीन के माध्यम से उर्वरक विक्रय, स्टॉक एवं बिक्री रजिस्टर तथा गोदाम में उपलब्ध स्टॉक की जांच की गई। साथ ही किसानों को बिल उपलब्ध कराने, प्रतिष्ठान पर दर सूची एवं स्टॉक बोर्ड अद्यतन रखने, निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री, टैंिगंग(अन्य उत्पादों के साथ उर्वरक की जबरन बिक्री) तथा यूरिया के कृषि कार्यों के अतिरिक्त अन्य उपयोगों के लिए विक्रय की भी जांच की गई। विक्रेताओं को किसानों की जमाबंदी का अवलोकन कर आवश्यकतानुसार उर्वरक वितरण करने के निर्देश दिए गए।

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निरीक्षण के दौरान मामूली कमियां पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं को मौके पर ही सुधार के निर्देश दिए गए। सभी आदान विक्रेताओं को उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985, बीज नियंत्रण आदेश, 1983 एवं कीटनाशी अधिनियम, 1968 के प्रावधानों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन अथवा निरस्तीकरण सहित आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूली अथवा टैगिंग संबंधी अनियमितता पाए जाने पर इसकी सूचना नजदीकी सहायक कृषि अधिकारी या कृषि पर्यवेक्षक को दें। शिकायत के साथ विक्रेता संस्था का नाम, स्थान, बिल एवं अन्य उपलब्ध दस्तावेज साझा करने से जांच एवं आवश्यक कार्यवाही में सहायता मिलेगी।