पशु मेला हमारी अर्थव्यवस्था, परंपरा और संस्कृति का जीवंत प्रतीक - राजपुरोहित

पशु मेला हमारी अर्थव्यवस्था, परंपरा और संस्कृति का जीवंत प्रतीक - राजपुरोहित

-मां कात्यायनी देवी राज्य स्तरीय पशु मेले का भव्य समापन

जालोर. जालोर विधानसभा क्षेत्र के उपखंड सायला में जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग एवं मां कात्यायनी देवी पशु सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “मां कात्यायनी देवी पशु मेला एवं भव्य पशु प्रदर्शनी” का गुरुवार को उत्साह और उल्लास के साथ समापन हुआ। मेले में दूर-दराज से आए पशुपालकों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जसराज राजपुरोहित उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित पशु मेला केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन परंपरा और हमारी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मेले पशुपालकों को अपनी उत्कृष्ट नस्लों और पारंपरिक ज्ञान के प्रदर्शन का मंच प्रदान करते हैं, साथ ही सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने का अवसर भी देते हैं।

 उत्कृष्ट पशुपालकों का किया सम्मान

मेले के दौरान विभिन्न श्रेणियों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले पशुओं एवं उनके पशुपालकों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया गया। इस अवसर पर राजपुरोहित ने पशुपालकों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें पशुपालन विभाग की योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

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समारोह में महंत अमृतनाथ महाराज (निंबावास मठ), मां कात्यायनी देवी पशु मेला संरक्षक सुरेश राजपुरोहित, वरिष्ठ भाजपा नेता मंगलसिंह सिराणा, सायला उपखंड अधिकारी सूरजभान विश्नोई, सायला तहसीलदार लक्ष्मी चौधरी, पशुपालन विभाग के जॉइंट डायरेक्टर गिरधरसिंह सोढा, मेला समिति के मंगलसिंह सायला, हड़मतसिंह सोढा, नरेंद्र पाल सिंह ओटवाला एवं बलवंत आसाना सहित बड़ी संख्या में पशुपालक बंधु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मेले के सफल आयोजन को क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पशुपालकों में उत्साह और सरकार की योजनाओं के प्रति जागरूकता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

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यह आयोजन न केवल पशुपालन को बढ़ावा देने का माध्यम बना, बल्कि सायला की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सफल रहा।