आहोर विधायक ने विधानसभा में बागरा में राजकीय कॉलेज की मांग रखी, लेकिन आवश्यकता सियाणा व सांथू को अधिक !

आहोर विधायक ने विधानसभा में बागरा में राजकीय कॉलेज की मांग रखी, लेकिन आवश्यकता सियाणा व सांथू को अधिक !

दिलीप डूडी, जालोर. विकास कार्य जरूरत और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाय तो यह भविष्य के लिए भी मजबूती प्रदान करता है, लेकिन कई बार जनप्रतिनिधि वोट बैंक के समीकरण में इन बिंदुओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा उस क्षेत्र की जनता को लंबे समय तक भुगतना पड़ता है। एक ऐसे ही विषय पर आज यहां पाठकों का ध्यानाकर्षण करवाना चाह रहे हैं। 

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दरअसल, शुक्रवार को आहोर विधायक छगनसिंह राजपुरोहित ने सोहलवीं विधानसभा के पाँचवें सत्र की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में पर्ची के माध्यम से विधानसभा क्षेत्र के बागरा एवं भंवरानी में नवीन महाविद्यालय की स्थापना के विषय पर अपनी बात रखी। इस दौरान विधायक राजपुरोहित ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बागरा व भँवरानी शीघ्र नवीन महाविद्यालय स्वीकृत किया जाए। ताकि उच्च शिक्षा की सुविधा क्षेत्र में उपलब्ध होने से हमारे युवाओं को दूर नहीं जाना पड़ेगा और बेटियों की शिक्षा को भी नई दिशा मिलेगी। क्षेत्र के समग्र विकास एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण हेतु यह मांग अत्यंत आवश्यक है। इस मांग के जरिए न केवल उच्च शिक्षा की सुविधा होगी, बल्कि विधायक ने विधानसभा क्षेत्र के दोनों सिरों को खुश करने का प्रयास किया है। 

भाद्राजून से बेहतर भवरानी का चयन

आपको बता दें कि आहोर विधानसभा क्षेत्र में केवल आहोर मुख्यालय पर ही राजकीय कॉलेज है। वहीं करीब 40 किलोमीटर दूर भाद्राजून में भी कॉलेज नहीं है, लेकिन विधायक छगनसिंह राजपुरोहित ने केंद्र बिंदु मानते हुए भवरानी का चयन किया, हालांकि इसे भी अन्य लोग राजनीतिक निर्णय बता रहे है, लेकिन जगह व परिस्थितियों को देखते हुए यह स्थान उचित कहा जा सकता है। क्योंकि भवरानी केंद्र बिंदु है, इसके आसपास रायथल, नोसरा, ओड़वाड़ा, भोरडा जैसे गांव लगते है, ऐसे में यहां के बेटे बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

बागरा के बजाय सियाणा-सांथू को अधिक जरूरत

इस मांग में भवरानी के साथ विधायक ने बागरा में भी राजकीय कॉलेज की मांग रखी है, लेकिन इस स्थान को लेकर कुछ सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल विधायक स्वयं ने सुझाव में दूरी का हवाला दिया है, इस लिहाज से बागरा के बजाय सियाणा या सांथू में कॉलेज की आवश्यकता अधिक है। क्योंकि बागरा तो जिला मुख्यालय से केवल 18 किलोमीटर दूर है, यहां की जनंसख्या भी वर्ष 2011 के मुताबिक 12 हजार है। इस गांव का जिला मुख्यालय से सीधा जुड़ाव भी है, वहीं सियाणा जिला मुख्यालय से 34 किलोमीटर दूर है और वहां के सीमांत गांवों का जुड़ाव न तो जिला मुख्यालय से है और न ही आहोर उपखण्ड मुख्यालय से, सियाणा से संसाधन भी उपलब्ध नहीं होते है।

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सियाणा की जनसंख्या भी वर्ष 2011 के मुताबिक करीब 11 हजार से अधिक है। इस लिहाज से दूरस्थ गांवों के बेटे-बेटियों के लिए सियाणा में उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज हो तो बेहतर रहती है। ऐसी ही स्थिति जालोर विधानसभा क्षेत्र के सांथू की है, करीब 9 हजार की जनसंख्या वाले इस गांव का भी संसाधनों के लिहाज से सीधा जुड़ाव जिला मुख्यालय से नहीं है। सांथू के नजदीक भी कई बड़े बड़े गांव है, ऐसे में यहां राजकीय कॉलेज हो तो विद्यार्थियों को सुविधा रहेगी।

...तो फिर रह जाएंगे वंचित!

विधायक की मांग पर वर्तमान में बागरा में राजकीय कॉलेज स्वीकृत हो जाती है तो परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में वर्षों तक सियाणा व सांथू जैसे कस्बों में नियमानुसार राजकीय कॉलेज नहीं खुल पाएंगे। जिसका खामियाजा लंबे समय तक यहां के बेटे बेटियों को भुगतना पड़ेगा।

इनका कहना है...

बागरा से अच्छा सियाणा में कॉलेज खुलती तो सियाणा, चांदना, काणदर, रायपुरिया, सिवना , देवाड़ा, भेटाला, मायलावास समेत कई गांवों के छात्रों के लिए वरदान साबित होगा, बागरा के लिए तो जिला मुख्यालय नजदीक ही है।

  • कन्हैयालाल प्रजापत, ग्रामीण पत्रकार, सियाणा

कॉलेज के अभाव में बालक बालिकाओं द्वारा आगे की पढ़ाई छोड़ दी जाती थी। सियाणा से सिरोही 45 किमी व जालौर 35 किमी दूर होने से गरीब परिवार के लोग वहां पहुंचने में असमर्थ होने से अगर सियाणा को केन्द्र बिंदु मानकर कॉलेज स्वीकृत करवाई जाय तो कई गांवों के विद्यार्थियों को फायदा होगा।

  • कांतिलाल राजपुरोहित, ग्रामीण पत्रकार, भेटाला
आहोर विधायक ने मांग रखी है, जायज होगी, लेकिन हमारे जालोर विधायक कब ध्यान देंगे। जालोर विधायक चाहते तो बागरा के स्थान पर सांथू में कॉलेज शुरू हो सकती है। इससे आसपास के कई गांवों के विद्यार्थियों को फायदा भी मिलेगा।
  • मांगीलाल देवासी, प्रशासक, सांथू