108 शिव प्रतिमाओं और 121 वाहनों के साथ शोभायात्रा में उमड़ा भक्ति का सैलाब
जालोर. स्वर्णगिरि की नगरी जालोर पूरी तरह से 'शिवमय' नजर आई। महाशिवरात्रि 2026 के उपलक्ष्य में शहर में पहली बार आयोजित हुई ऐतिहासिक शोभायात्रा ने न केवल भक्ति की नई मिसाल पेश की, बल्कि भव्यता के मामले में भी पुराने सभी कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता 121 वाहनों का विशाल काफिला और उन पर विराजित 108 शिव प्रतिमाएं रहीं, जिन्हें देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।
वाहन रैली के साथ हुआ शंखनाद
शोभायात्रा का आगाज रविवार सुबह 9:30 बजे श्री महावीर जीवदया गौशाला से हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में एक विशाल वाहन रैली निकाली गई, जिसने पूरे शहर को केसरिया रंग में रंग दिया। रैली में सबसे आगे घोड़ों पर सवार युवा हाथों में धर्मध्वजा लिए चल रहे थे, जिसके पीछे सैकड़ों की संख्या में दुपहिया और चौपहिया वाहनों का अंतहीन काफिला था। 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से जालौर की गलियां गुंजायमान हो उठीं।
इनका रहा सान्निध्य
रमेश गिरी गुप्तेश्वर जी से , हनुमान गिरी कालका मठ, गोपालनाथ अखाड़ा पवनपुरी चामुण्डा माता मंदिर , गोविंद नाथ नागणेशी मंदिर
108 शिव प्रतिमाएं: एक अलौकिक दृश्य
इस शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण 121 विशेष रूप से सजाए गए वाहन थे, जिनमें भगवान शिव के 108 विभिन्न स्वरूपों की प्रतिमाएं विराजमान थीं। जालौर के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब इतनी बड़ी संख्या में शिव प्रतिमाओं का नगर भ्रमण कराया गया हो।

विज्ञापन
रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर महादेव का स्वागत किया। जगह-जगह स्वयंसेवी संस्थाओं और शहरवासियों द्वारा ठंडे पानी, शरबत और स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई थी।
भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम
जैसे-जैसे यह काफिला शहर के मुख्य मार्गों से गुजरा, श्रद्धा का सैलाब बढ़ता गया। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, डीजे की धुन और ऊंट-घोड़ों के साथ निकली इस रैली ने अनुशासन और भव्यता का परिचय दिया। प्रशासनिक व्यवस्था भी चाक-चौबंद नजर आई ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
रात्रि में 'जटाधारी ग्रुप' की गूंज
शोभायात्रा के समापन के बाद, आज रात्रि को दिल्ली के मशहूर 'लकी चालू जटाधारी ग्रुप' द्वारा भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। शिव के रौद्र और शांत रूपों की जीवंत झांकियां और सुरीले भजनों का यह कार्यक्रम पूरी रात जालौर को शिव भक्ति के आनंद में सराबोर रखेगा। जालौर की जनता के लिए यह आयोजन केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि आस्था का एक ऐसा महाकुंभ बन गया है जिसकी चर्चा आने वाले कई वर्षों तक की जाएगी।