तैयार भवन, बंद दरवाजे: बागरा का नया अस्पताल बना शोपीस

तैयार भवन, बंद दरवाजे: बागरा का नया अस्पताल बना शोपीस
  • जनता पूछ रही सवाल: जब भवन तैयार है तो उद्घाटन क्यों नहीं?
  • करोड़ों की लागत से बना भवन, प्रशासनिक सुस्ती की भेंट चढ़ा

देवेन्द्रराज सुथार @ DDTNews. बागरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बना नया अस्पताल भवन लंबे समय से उद्घाटन की बाट जोह रहा है। दिवाली से पहले इस भवन का समस्त निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका था और ठेकेदार द्वारा इसे विभाग को विधिवत हैंडओवर भी कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद औपचारिक उद्घाटन नहीं हो पाया है। नतीजतन करोड़ों रुपये की लागत से तैयार आधुनिक सुविधाओं वाला भवन बंद पड़ा है और मरीज पुराने चिकित्सा भवन में इलाज कराने को मजबूर हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि उद्घाटन के बिना ही इसी नए भवन में हाल ही में दस दिन तक चले आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर के दौरान मरीजों को भर्ती किया गया। शिविर के दौरान भवन का उपयोग तो कर लिया गया, लेकिन शिविर समाप्त होते ही इसे फिर से बंद कर दिया गया। इससे क्षेत्र में यह सवाल उठने लगे हैं कि जब बिना उद्घाटन भवन का उपयोग संभव है, तो फिर नियमित रूप से मरीजों के लिए इसे क्यों नहीं खोला जा रहा।

वर्तमान में मरीजों को पुराने चिकित्सा भवन में भर्ती किया जा रहा है, जहां सुविधाओं की भारी कमी है। पुराने भवन में पर्याप्त बेड नहीं हैं, जिससे कई बार मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। इसके साथ ही बिजली की 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति नहीं होने से भी मरीजों और चिकित्सा स्टाफ को परेशानी उठानी पड़ रही है। सर्दी के मौसम में जब बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर रोगियों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, तब ऐसी अव्यवस्थाएं मरीजों की मुश्किलें और बढ़ा देती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नए अस्पताल भवन में पर्याप्त कमरे, बेड, बेहतर वेंटिलेशन और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। यदि इसे शुरू कर दिया जाए, तो न केवल भर्ती मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को भी बेहतर माहौल में काम करने का अवसर मिलेगा। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर हो रही देरी समझ से परे है।

बागरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रतिदिन औसतन 120 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें आसपास के गांवों से आने वाले मरीजों की संख्या भी बड़ी है। सर्दी के मौसम में सर्दी-खांसी, बुखार, जोड़ों के दर्द और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन संसाधनों के अभाव में समुचित उपचार देना चुनौती बनता जा रहा है।

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ग्रामीणों और मरीजों के परिजनों में इस स्थिति को लेकर रोष है। उनका कहना है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनता की सुविधा के लिए भवन बनाया गया, लेकिन वह सिर्फ कागजों में ही तैयार माना जा रहा है। उद्घाटन के नाम पर हो रही देरी को लोग लापरवाही और उदासीनता से जोड़कर देख रहे हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए जल्द से जल्द नए अस्पताल भवन का उद्घाटन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भवन का संचालन शुरू हो जाता है, तो बागरा ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। साथ ही उच्च अधिकारियों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर आवश्यक निर्णय लें।

कुल मिलाकर, बागरा में नया अस्पताल भवन तैयार होकर भी आमजन की सेवा से दूर है। जब तक इसका उद्घाटन कर नियमित संचालन शुरू नहीं किया जाता, तब तक मरीजों की परेशानी कम होने की उम्मीद नजर नहीं आती। अब देखना यह है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कब जागता है और जनता को इस बहुप्रतीक्षित सुविधा का वास्तविक लाभ कब मिलता है।