पन्द्रह साल कैंसर से संघर्ष करने वाले जालोर के पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल का 82 वर्ष की उम्र में निधन

पन्द्रह साल कैंसर से संघर्ष करने वाले जालोर के पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल का 82 वर्ष की उम्र में निधन
  • शुरुआत निर्दलीय से की और अंत में भी निर्दलीय ताल ठोकी

जालोर. जालोर के पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल का बुधवार को पैतृक गांव रेवतड़ा में निधन हो गया। वे 82 वर्ष के थे। उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ी। उनके बड़े बेटे रमेश मेघवाल ने बताया कि बीते कुछ दिनों से स्वास्थ्य नरम होने के चलते जोधपुर में उपचार लिया, उसके बाद अहमदाबाद में उपचार चला। एक दिन पहले रेवतड़ा आये थे, बीती रात को अंतिम सांस ली। रामलाल मेघवाल जालोर जिले के दलित समाज के सबसे कद्दावर नेता थे।

पांच बार हार के बाद छठे चुनाव में मिली थी जीत

रामलाल मेघवाल ने युवावस्था से ही दलितों के हितों की रक्षा को लेकर संघर्ष किया था। इस कारण 1977 में पहली बार निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़कर मैदान में ताल ठोकी, लेकिन वे हार गए थे। इसके उनकी मेहनत को देखते हुए 1990 में कांग्रेस ने उन्हें टिकट दी, लेकिन जीत नहीं पाए। इसके बाद 1993 व 1998 में वे निर्दलीय चुनाव लड़े। जीत नहीं पाए।

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फिर कांग्रेस ने 2003 में एक बार फिर टिकट दी, लेकिन वसुंधरा राजे की भाजपा लहर में हार गए, लेकिन वर्ष 2008 में कांग्रेस की टिकट पर रामलाल मेघवाल ने जोगेश्वर गर्ग को करीब 17 हजार से अधिक मतों से हराकर पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 2013 में वे हार गए। वर्ष 2018 में पार्टी ने टिकट काट दी, वहीं 2023 के चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर अंतिम चुनाव निर्दलीय लड़े और वर्ष 2024 में कांग्रेस का साथ छोड़कर लोकसभा चुनाव में भाजपा का दामन थाम लिया। 

खुशमिजाज थे रामलाल

रामलाल मेघवाल जितने संघर्षशील थे, उतने ही खुशमिजाज के थे। वे बडों से लेकर छोटी उम्र के युवाओं के भी चहेते थे। जब पहली बार 2008 में विधायक निर्वाचित हुए, तब 2009 में उन्हें पहलीबार अनौपचारिक स्वास्थ्य जांच में कैंसर बीमारी होने की जानकारी सामने आई। उसके बाद वे एक बार गम्भीर बीमार हुए, लेकिन स्वास्थ्य को रिकवर कर लिया। वे करीब पंद्रह वर्ष तक इस कैंसर बीमारी से जूझते रहे, लेकिन उन्होंने चेहरे पर कभी चिंता नहीं आने दी। पिछले दिनों अचानक तबीयत खराब हो गई। जिस कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।