केसरिया वाहन रैली और भव्य शोभायात्रा से गूंजा नगर
जालोर. सायला शहर में बुधवार को गढ़ परबतसर के शासक राणा चच्चदेव दहिया की 1059 वी जयंती पर भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। शोभायात्रा को लेकर प्रात: से हीं दहियावाटी से समाज बंधुओ का केसरिया साफा पहनकर पारंपरिक वेशभूषा में कात्यायनी माता के प्रांगण में एकत्रित होने लगे।

विज्ञापन
इसके बाद ढोल ढमाकों के साथ मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों के साथ गुलाल और पुष्पवर्षा के बीच राणा चच्चदेव की तस्वीर के साथ शोभायात्रा रवाना हुई।जो सायला के प्रमुख मार्गो से गुजरती हुई राणा वाराह सर्कल पहुंची । जहां पर घोड़ों पर सवार अश्वरोहियों द्वारा पुष्पवर्षा और गुलाल के साथ हजारों की संख्या में दहिया राजपूत द्वारा राणा वाराह को नमन करते हुए रियासत काल में ऐतिहासिक महत्वपूर्ण स्थल जूना गाला तूरा पहुंचे।जहां पर भव्य शोभायात्रा के बाद महासभा का आयोजन किया गया।

विज्ञापन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी संत रामविचार महाराज भक्तियोग आश्रम जोधपुर,निवर्तमान लूणी प्रधान वीरेंद्रप्रतापसिंह, पूर्वप्रधान कल्याणपुर हरिसिंह दहिया, श्रीक्षत्रिय युवक संघ प्रांत प्रमुख ईश्वर सिंह सांगाना ,सर्कल इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह मौछाल, आबकारी निरीक्षक डा. शंभूसिंह सेरना, भाजपा जिला उपाध्यक्ष उदयसिंह दादाल,भाजपा मंडल अध्यक्ष बालोतरा गणपत सिंह भाटी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मंचासीन अतिथियों द्वारा सर्वप्रथम कैवाय माता और राणा चच्चदेव की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्प अर्पण कर महासभा का विधिवत रूप से आगाज किया गया।
जिसमें जोरावर सिंह आसाना ने अभिनंदन के रूप मंचस्थ अतिथियों एवं उपस्थित महानुभावों का स्वागत भाषण के साथ अभिनंदन किया। अंतरराष्ट्रीय संत रामविचार महाराज ने क्षत्रियों को सम्बोधित करते हुए कहाकि जब जब धर्म पर संकट आया तब तब क्षत्रियों ने शस्त्र उठा कर उनकी रक्षा की हैं।उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी हैं कि भगवान के अनेक अवतार क्षत्रिय कुल में हुए हैं। इस अवसर पर क्षत्रियों को नशा मुक्त जीवन अपनाने,राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी।देवेंद्र सिंह देवड़ा मौछाल ने दहिया राजवंश के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया की दहिया राजवंश का 11वीं से 13वीं सदी में परबतसर एवं मारोठ परगने में स्वतंत्र शासन था जो प्राचीन समय में दहियावटी कहलाती थी।जिसमें शेखावटी का अधिकांश भाग आता था। शक्तिशाली राजा केमास और चामुंडराय की यशोगाथा का वर्णन करते हुए बताया कि उनके नेतृत्व में अजमेर के चौहान राजा पृथ्वीराज द्वारा अनेकों युद्धों में विजय प्राप्त हुई जिनका नेतृत्व दहिया सामंत कैमास और चामुंडराय दहिया द्वारा किया गया ।

विज्ञापन
वहीं वक्ता के रूप में उपस्थित निवर्तमान लूणी प्रधान वीरप्रताप सिंह ने दहिया राजवंश के प्राचीनतम इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह वो राजवंश हैं।जिनसे सहायता मांगने को स्वयं देवता भी आए थे। जहां पर हड्डियों को वज्र बना कर उनको सहायता प्रदान की गई थी,पूर्वप्रधान हरिसिंह दहिया कल्याणपुर ने कहा कि संपूर्ण क्षत्रियों को एक होकर पंचायती राज संस्थाओं में भी EWS आरक्षण को लागू करने के लिए संघर्ष करना चाहिए।श्रीक्षत्रिय युवक संघ के प्रांत प्रमुख ईश्वर सिंह सांगाणा ने राणा चच्चदेव की भांति क्षत्रियोचित संस्कारों के लिए शिविरों में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।वहीं पदमसिंह दहिया आसाना ने बताया कि रियासातकालीन दहिया राजपूतों द्वारा शासित दहियावटी के 84 गाँवों पर दहिया राजपूतों का स्वतंत्र शासन था और जोधपुर के तत्कालीन महाराजा अभयसिंह के आह्वान पर दहियों ने अहमदाबाद फ़तह किया और अपनी वीरता का परचम लहराया तथा दहियावटी के हर गाँव में दहिया राजपूतों की वीरता के प्रमाण वहाँ पर मौजूद देवलियों के रूप में स्थित है हर गाँव में लोक हितार्थ और गोरक्षार्थ दहिया राजपूतों द्वारा अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों की यशोगाथाएँ लोकगीतों के रूप में प्रचलित है इस अवसर पर आबकारी इंस्पेक्टर शंभुसिंह सेरना , महेंद्र सिंह तुरा ने संपूर्ण क्षत्रियों को इस लोकतंत्र के दौर में एकजुट रहने का आह्वान किया और अंत में राणा पहाड़ सिंह देता ने सभी का आभार प्रकट किया ।

इस अवसर पर दहियावटी राजपूत संघ की विधिवत घोषणा की गई।जिसमें सर्वसम्मति से कल्याणसिंह दहिया तूरा को अध्यक्ष चुना गया। इसके साथ ही अन्य पदाधिकारियों में जबरसिंह देता व मंगल सिंह सायला को उपाध्यक्ष,गुमानसिंह चौराऊ को सचिव , उदयसिंह दादाल को सहसचिव ,जबरसिंह आसाना को कोषाध्यक् ,विजयसिंह सुराणा को सहकोषाध्यक्ष एवं पेपसिंह साँफाड़ा,धनसिंह ओटवाला,हुकमसिंह कोमता और हरिसिंह थलवाड़ को सदस्यों के रूप में मनोनीत किया गया। नवगठित कमेटी ने समाज को संगठित करने ,शिक्षा, सामाजिक सुधार एवं युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर सरपंच खेतसिंह दूदवा (बालोतरा),पूर्व उपप्रधान खंगार सिंह आसाना,दुर्गसिंह तूरा,भोपसिंह सुराणा,अभयसिंह ,भीम सिंह सुराणा,कल्याणसिंह वालेरा ,चंदनसिंह कोमता,शेरसिंह सुराणा,मोड़सिंह,भेरुसिंह मोकनी,पांडवसिंह,मान सिंह चौराऊ , विक्रमसिंह ,इन्द्रसिंह सायला,हरि सिंह , मेघसिंह,राणसिंह तुरा सहित समाज बंधु मौजूद थे।