जरुरतमंद प्रतिभावान बेटे-बेटियों की उन्नति में मददगार बन रही राजपूत समाज की "शिक्षा नेग" पहल
- राजपूत समाज के विवाह-मायरा आदि सामाजिक खर्चों का आधा प्रतिशत शिक्षा के लिए उपहार स्वरूप दान, राजपूत शिक्षा कोष संस्थान के तहत किया जा रहा है कार्य
दिलीप डूडी, जालोर. व्यक्ति विशेष या समूह के लिए सहायता करने के कई तरीके है, लेकिन सबसे बेहतरीन तरीका है किसी को शिक्षा के जरिए समर्थ बनाने का, कुछ ऐसा ही कार्य कर रही है मारवाड़ क्षेत्र के राजपूत समाज की एक संस्थान, जिसकी पहल अब धीरे-धीरे फलीभूत होने लगी है। दरअसल, राजपूत समाज के जरूरतमंद प्रतिभावान बेटे-बेटियों को शिक्षा में सहयोग के लिए राजपूत समाज की ओर से राजपूत शिक्षा कोष संस्थान के तहत शिक्षा नेग पहल शुरू की गई है, इसके तहत प्राप्त राशि को जरूरतमंद के लिए दिया जाता है।
क्या है यह पहल, कैसे शुरू हुई शिक्षा नेग
दरअसल, पूर्व सांसद व पदम् विभूषण डॉ नारायणसिंह माणकलाव की मंशानुरूप इस अनूठी पहल को वर्ष 2019 में शुरू किया गया है। राजपूत शिक्षा कोष के तहत इस अभिनव पहल का नाम 'शिक्षा नेग' रखा गया है। इसमें राजपूत समाज में कहीं भी शादी, मायरा या अन्य सामाजिक कार्यक्रम होने पर उसके अनुमानित पूरे खर्च की केवल आधा प्रतिशत राशि राजपूत शिक्षा कोष के तहत शिक्षा नेग के रूप में जमा की जाती है। ऐसे में आसान तरीके से समझा जाए तो कोई व्यक्ति किसी समारोह के लिए अगर 10 लाख रुपए खर्च करता है तो इसका आधा प्रतिशत के हिसाब से उससे शिक्षा नेग के रूप में 5 हजार रुपए लिए जा सकेंगे, इससे अधिक नहीं लेंगे। इसका मुख्यालय जोधपुर है।

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यह राशि सीधे खर्च नहीं की जाती। इसके लिए समाज की ओर से जिला स्तर पर हर वर्ष एग्जाम होता है। साथ ही पारिवारिक परिस्थितियों व परीक्षा के परिणाम में चयनित बालक-बालिकाओं को आवश्यकता अनुसार स्कूल- कॉलेज संस्थान को फीस के रूप में अदा कर दी जाती है। संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि अब तक इस पहल के जरिए राजपूत समाज के करीब 200 बेटे-बेटियों को लाभान्वित किया जा चुका है। कई डॉक्टर तो कई शिक्षक बने है, कई अभी भी अध्ययनरत भी है, जिनकी फीस राजपूत शिक्षा कोष के तहत जमा करवाई जा रही है।

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संस्थान की ओर से यह राशि वसूल करना अनिवार्य नहीं है, बल्कि खर्च करने वाले स्वयं की इच्छा पर निर्भर रखा गया है। इसलिए अधिकतम आधा फीसदी ही रखा गया है। इसकी जनजागरूकता अब धीरे-धीरे समाज में आने लगी है, जिस कारण आयोजनकर्ता स्वयं संस्था के पदाधिकारियों को इसके लिए आमंत्रित कर राशि जमा करवा रहे हैं।
योगेंद्रसिंह कुम्पावत ने 25 हजार रुपए का दिया शिक्षा नेग
इसी पहल के तहत संस्थान को शनिवार 29 नवम्बर 2025 को चांदना में एक कार्यक्रम में 25 हजार रुपए का शिक्षा नेग दिया गया। जालोर के निकटवर्ती चांदना में हो रही एक शादी के दौरान मायरा पक्ष द्वारा 50 लाख का मायरा किया गया।इस कुल खर्च का आधा प्रतिशत हिस्सा 25 हजार रुपए भेंट स्वरूप राजपूत शिक्षा कोष संस्थान को शिक्षा नेग के रूप में दिए गए।

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संस्थान के जालोर जिला प्रतिनिधि गणपतसिंह मंडलावत भवरानी ने डीडीटी न्यूज़ को बताया कि योगेंद्रसिंह कुम्पावत सिंगासनी हाल निवासी जालोर के भाणेज की शादी के दौरान अपनी बहिन के मायरा भरने की रश्म अदा की गई। मायरा के लिए आभूषण, नकद भेंट और पोशाक, कपड़े सहित विभिन्न व्यवस्था में हुए करीब 50 लाख रुपए खर्च का आधा फीसदी अंश समाज में शिक्षा सहयोग के रूप में राजपूत समाज के प्रतिभावान बालक बालिकाओं को आर्थिक सहयोग के लिए चल रहे अभियान में नेग के रूप में दान दिया गया।

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कुंपावत ने बताया कि हम खुशी से शादी विवाह और बहन बेटियों के लिए जितना भी खर्च करें वह कम है, लेकिन समाज के निम्न तबके की बहन बेटियां भी हमारी ही है, उनके लिए सहयोग करना भी हम सभी का दायित्व बनता है। इसी विचार को मध्यनजर रखकर मुझे राजपूत शिक्षा कोष के श्यामसिंह चौहान सजाडा से प्रेरणा मिली।

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हमारे परिवार ने पूर्व में भी शादी विवाह के अवसर पर शिक्षा नेग की राशि हमेशा दान की है। इसी प्रेरणा के चलते आज बहिन के भात और मायरा के शुभ अवसर पर यह राशि समाज के बालकों के सहयोग हेतु राजपूत शिक्षा कोष को प्रदान की गई है। पद्मभूषण नारायणसिंह मानकलाव द्वारा चलाए गए इस पुण्य शुभ अवसर के खुमानसिंह कुम्पावत, भवानीसिंह, भवरसिंह चौहान, प्रताभसिंह राणावत, देवीसिंह, राणसिंह, किशनसिंह, खेतसिंह भाटी, भेरसिंह, वीरेन्द्रसिंह, गोपालसिंह मंडलावत, डूंगरसिंह, दिलीपसिंह बालावत, महावीसिंह खिंची, देवेन्द्रसिंह, परमवीरसिंह भाटी, भवानीसिंह देता, प्रदीपसिंह भाटी, सतपालसिंह चौहान, यशपालसिंह, संजय सिंह, रघुनाथसिंह कुम्पावत, बबलूसिंह, कमलसिंह, हिमांशुसिंह, अनवीरसिंह, रणंजयसिंह, खसाराम माली, केलाश माली सहित दोनों पक्ष के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।