आज के समय में सोशल मीडिया पर मूल्यों के विपरीत अभिव्यक्तियां न्याय व्यवस्था के लिए बन रही चुनौती - राठी

आज के समय में सोशल मीडिया पर मूल्यों के विपरीत अभिव्यक्तियां न्याय व्यवस्था के लिए बन रही चुनौती - राठी
  • जालोर में “वैल्यू बेस्ड जस्टिस – द सोल ऑफ लॉ” विषय पर संगोष्ठी आयोजित

जालोर. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन जूरिस्ट विंग, एवं बार एसोसिएशन जालोर के संयुक्त तत्वाधान में “वैल्यू बेस्ड जस्टिस – द सोल ऑफ लॉ” विषय पर एक प्रेरणादायक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

जालोर सेवा केंद्र प्रभारी राज योगी ने ब्रह्माकुमारी रंजू बहन ने कार्यक्रम में पधारे सभी मेहमानों का शब्दों के माध्यम से स्वागत किया और कार्यक्रम में पधारे सभी अधिवक्ता एवं अतिथिगण को राजयोग की जानकारी लेने के लिए केंद्र पर आने का निमंत्रण दिया।

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मुख्य वक्ता के रूप में सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश के न्यायाधीश एवं जूरिस्ट विंग आरईआरएफ के वाइस चेयरपर्सन भगवानदास राठी ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया पर मूल्यों के विपरीत अभिव्यक्तियां न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। उन्होंने बताया कि न्याय केवल कानून, साक्ष्य और दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और परिवार में भी न्याय-अन्याय का संतुलन आवश्यक है।

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उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे टैंक में जैसा पानी होगा, वैसा ही नल में आएगा, उसी प्रकार मूल्यहीन व्यक्ति का कार्य भी वैसा ही होगा। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज के लक्ष्य—पवित्रता एवं सकारात्मक एकाग्रता—पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मेडिटेशन से मन को शक्तिशाली बनाया जा सकता है। जिला एवं फैमिली कोर्ट जालोर के न्यायाधीश अमर वर्मा ने कहा कि राजयोग आध्यात्मिक उत्कृष्टता प्रदान करता है, जिससे तनाव का स्तर कम होता है और व्यक्ति अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने विचारों को बदल सकता है।

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नेशनल कोऑर्डिनेटर जूरिस्ट विंग आबूराज, डॉ. नथमल ने कहा कि न्यायपालिका पर समाज की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि आज समाज में बढ़ते मनोविकार, विशेषकर क्रोध, अपराधों का कारण बन रहे हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं को आगे आकर लोगों में आंतरिक शक्तियों को जागृत करना होगा। बी.के. लता आर. अग्रवाल, नेशनल कोऑर्डिनेटर जूरिस्ट विंग आबूराज ने कहा कि जीवन रूपी नाटक में यदि “हीरो पार्ट” निभाना है तो स्वयं को संस्कारों और मूल्यों से सजाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि परमात्मा ने इस सृष्टि रूपी नाटक की रचना की है, जिसमें प्रत्येक आत्मा एक भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि एक दिन में लगभग 40,000 विचार चलते हैं और अधिक सोचने से तनाव बढ़ता है, इसलिए “लॉ के साथ-साथ लव (Love) भावना फॉर जस्टिस” का होना आवश्यक है।

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जिला उपभोक्ता कोर्ट जालोर के अध्यक्ष घनश्याम यादव ने कहा कि न्याय व्यवस्था में मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है, जिससे समाज में संतुलन और शांति स्थापित हो सके। बार एसोसिएशन जालौर के अध्यक्ष खसाराम परिहार ने भी अपने उद्बोधन में शुभ प्रेरणाएं दीं। कार्यक्रम के अंत में रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, पीएचईडी जालौर भंवरलाल सुथार ने सभी का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन बीके अस्मिता दीदी, राजयोग शिक्षिका पचपदरा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बीके मीनाक्षी (सिणधरी), बीके पवनी (सायला), बीके रिंकू (पोकरण), बीके शिल्पा, बीके ज्योति (चांदराई), लक्ष्मी नारायण, डॉ. पुंसल, बीके ललित, उम्मेद सिंह चरण,विक्रम प्रकाश, बीके सुरेश, विद्या, रवि, बीके जसवीर सहित अनेक अधिवक्ता गण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।