कांग्रेस 10 जनवरी से 6 फरवरी तक करेगी मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन

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DDT Team Verified Media or Organization • 01 Aug, 2026 Chief Editor
Jan 6, 2026 • 6:56 PM  0
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कांग्रेस 10 जनवरी से 6 फरवरी तक करेगी मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन
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6 Jan 2026
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कांग्रेस 10 जनवरी से 6 फरवरी तक करेगी मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन

जालोर. ग्रामीण आजीविका पर केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा किए गए  गंभीर हमले को देखते हुये  राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार जिला कांग्रेस कमेटी जालोर द्वारा "मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन" शुरू करने का निर्णय लिया है ताकि काम के अधिकार की रक्षा की जा सके और मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जा सके। इसी के तहत आगामी 10 जनवरी से 06 फ़रवरी तक जालोर जिले मे विभिन्न जन-आंदोलन जिलाध्यक्ष रमिला मेघवाल के नेतृत्व मे आयोजित किये जायेंगे।

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जिला प्रवक्ता योगेंद्र सिंह कुम्पावत ने बताया की आगामी 10 जनवरी, 2026 को कांग्रेस कार्यालय  राजीव गाँधी भवन जालौर में अभियान के औपचारिक शुभारम्भ हेतु प्रेस कान्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी।जिसमें प्रस्तावित कानून के ग्रामीण - रोजगार और आजीविका पर पडने वाले दुष्प्रभावों को मीडिया के माध्यम से उजागर किया जाएगा। 11 जनवरी, 2026 को  डॉ.भीमराव अम्बेडकर सभा स्थल जालौर के सम्मुख, पार्टी नेता, निर्वाचित प्रतिनिधियों और मनरेगा श्रमिकों की भागीदारी के साथ एक दिवसीय उपवास आयोजित किया जायेगा। आगामी 12 जनवरी से 29 जनवरी 2026 तक जिले की ग्राम पंचायत स्तर पर चौपाले एवं जनसम्पर्क कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। 30 जनवरी, 2026 को जिले की  पंचायती राज संस्थाओं के वार्डों और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों द्वारा शांतिपूर्ण धरने आयोजित किये जाकर अहिंसा, संवैधानिक मूल्यों और काम के अधिकार पर चर्चा की जाए। 31 जनवरी से 06 फरवरी, 2026 तक  जिला मुख्यालय जालौर पर जिला कांग्रेस कमेटी जालोर द्वारा जिला कलेक्टर के कार्यालयों पर धरना आयोजित किया जायेगा। धरने की समाप्ति पर जिनके पश्चात् VB-GRAM-G विधेयक को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग करते हुये ज्ञापन सौंपा जायेगा।

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कुम्पावत ने बताया कि महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) जिसे वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया था, एक अधिकार-आधारित कानून है जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है। कानून के तहत् राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिये बाध्य है अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की मूल और परिभाषित विशेषता है। मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है। यह प्रतिवर्ष 5-6 करोड परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है, मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करता है, ग्रामीण मजदूरी बढाता है और टिकाऊ सामुदायिक परिसम्पतियों का निर्माण करता है। इसकी मांग-आध् पारित संरचना, सुनिश्चित मजदूरी और सीधे बैंक भुगतान की व्यवस्था से विशेष रूप से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित समुदायों को लाभ हुआ है, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्य दिवसों का लगभग 60 प्रतिशत है। नया VB-GRAM-G अधिनियम इस पूरे ढांचे से एक मौलिक विचलन है। यह काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है, निर्णय प्रक्रिया का केन्द्रीकरण केन्द्र सरकार के हाथों में करता है, ग्राम सभाओं और पंचायतों को कमजोर करता है तथा केन्द्र के मजदूरी अंशदान को लगभग 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर देता है, जिससे वित्तीय बोझ राज्यों और श्रमिकों पर डाल दिया जाता है। बजट सीमित आवंटन, कृषि के चरम मौसम में कार्य पर प्रतिबंध और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों का कमजोर होना अनिवार्य रूप से रोजगार में कमी, मजदूरों के दमन और ग्रामीण संकट में वृद्धि का कारण बनेगा। कार्यक्रम से महात्मा गाँधी के नाम को हटाया जाना भी श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के उन मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास दर्शाता है जिन पर मनरेगा आधारित है।

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