श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक तनसिंह की 102 वीं जयंती पर हुए आयोजन

श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक तनसिंह की 102 वीं जयंती पर हुए आयोजन

जालोर. स्वधर्म पालन के लिए सर्वप्रथम लक्ष्य की प्रतिज्ञा पूर्वक शुरुआत करनी पड़ती है विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष से कर्मरत होकर समाज को रास्ता बताने का कार्य संभव है। क्षात्र धर्म किसी जाति या समाज के बंधन में बंधकर नहीं रहता। जीवन प्रणाली में जीकर रास्ता बताने का कार्य है। जो भगवान राम, बुद्ध, कृष्ण, राजा भोज, विक्रमादित्य, गोपीचंद, भर्तृहरि और दुर्गादास की परंपरा अनुसार मानव मात्र को प्रेरणा प्रदान कर सकता है। सभी महापुरुषों के जीवन की तरह ही तनसिंह के जीवन का अध्ययन किया जाए तो मात्र 55 वर्ष की उम्र में राजनीति, सामाजिक पथ प्रदर्शन, व्यापार , वकालत, लेखन, नेतृत्व और संगठन आदि सभी कार्यों के हिसाब से एक महामानव जैसी दिशा दिखाने का कार्य किया।

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    गीता पर आधारित श्री क्षत्रिय युवक संघ की संस्कार मय कर्म प्रणाली प्रदान कर जाति, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए बहुत बड़ा कार्य कर गए जो आज पूरे संसार में दिखना प्रारंभ हो गया है। यह बात रविवार को सिरोसी माता मंदिर प्रांगण देलदरी में आयोजित जयंती कार्यक्रम में संभाग प्रमुख अर्जुनसिंह देलदरी ने बतौर मुख्य वक्ता कही।

   तनसिंह रचित झनकार गीतमाला से "क्षत्रिय कुल में प्रभु जन्म दिया, तो...." प्रार्थना से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम तनसिंह के चित्र पर पुष्पांजलि और दीपक प्रज्ज्वलन हुआ। कार्यक्रम परिचय और भूमिका के बाद दीपसिंह दूधवा ने संस्थापक का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके जीवन की मुख्य घटनाओं और प्रेरक कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान की। 

       जयंती कार्यक्रम को चंद्रवीरसिंह रामसिन, राजेंद्रसिंह आकोली, रूपसिंह नारणावास, बालूकंवर मांडानी सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। औपचारिक शुरुआत से पूर्व माताजी मंदिर के प्रांगण में खुशहाली हेतु रश्मिकंवर और मातृशक्ति द्वारा यज्ञ भी किया गया। मुख्य उद्बोधन से पूर्व झबरसिंह लूणा द्वारा प्रेरक सहगीत "मैं निर्झर हु, पर्वत से बह......." प्रस्तुत किया गया। 

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           आकोली मंडल के इस कार्यक्रम में ईश्वरसिंह शैतानसिंह, गणपतसिंह, गंगासिंह, जगतावरसिंह, अर्जुनसिंह, नेपालसिंह, गजेंद्रसिंह, संग्रामसिंह सहित आसपास के कई पुरुष महिलाएं और स्वयंसेवक सहित राजपूत समाज के प्रबुद्धजन और ग्रामीण मौजूद रहे।