चरखे से सूत कातकर गांधीवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा जालोर चरखा संघ

चरखे से सूत कातकर गांधीवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा जालोर चरखा संघ

जालोर. चरखे से सूत कातने की पारंपरिक कला को पुनर्जीवित कर आगे बढ़ाने और गांधीवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से जालोर चरखा संघ द्वारा जालोर जिला मुख्यालय स्थित शाह पुंजाजी गेनाजी स्टेडियम में दिनांक 2 नवम्बर 2025 से प्रत्येक रविवार को सुबह 7 बजे से 9 बजे तक साप्ताहिक दो घंटे का "चरखा अभ्यास" आयोजित  किया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार 19 अप्रेल को जालोर चरखा संघ द्वारा पच्चीसवां चरखा अभ्यास सम्पन्न हुआ।

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प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाले चरखा अभ्यास में लोगों की चरखे के प्रति जिज्ञासा और रुचि बढ़ रही हैI चरखा अभ्यास में चरखे से सूत कातने और सूत की माला बनाना सिखाया जा रहा है। चरखा अभ्यास में भाग लेने लोगों को आधुनिक फैशन की प्रचलन में चल रहे खादी वस्त्रों को पहनने के लिये भी प्रेरित किया जा रहा हैI  गांधीवादी विचारक और जालोर चरखा संघ के मुख्य प्रशिक्षक जितेन्द्र कसाना द्वारा चरखा अभ्यास में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान विशेष रूप से 'पेटी-चरखा' का उपयोग किया जा रहा है, जिसे 1940 के दशक में महात्मा गांधी ने यरवदा जेल में डिजाइन किया था। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को किसान-चरखा, गांधी-चरखा, ट्रावेल-चरखा, बुक-चरखा और अम्बर-चरखा जैसे विभिन्न प्रकारों से भी अवगत कराया जा रहा है Iयह पहल पटना के सदाकत आश्रम में साल 1925 में महात्मा गांधी द्वारा स्थापित "अखिल भारत चरखा संघ" की गौरवशाली परंपरा से प्रेरित है।

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इनका कहना है...

जालोर चरखा संघ एक पूर्णतः गैर-राजनैतिक संगठन है। यह मंच उन सभी लोगों के लिए उपलब्ध है, जो गांधीवादी विचारधारा में विश्वास रखते हैं, चाहे वे किसी भी सरकारी, निजी, असंगठित क्षेत्र अथवा किसी भी राजनैतिक या सामाजिक संगठन से जुड़े हुये हों।
-विनय व्यास, संयोजक, जालोर चरखा संघ