छह माह से बंद पीएम किसान पोर्टल, जालोर के किसान बेहाल

छह माह से बंद पीएम किसान पोर्टल, जालोर के किसान बेहाल

जालोर. जालोर तहसील में पिछले छह महीनों से पीएम किसान पोर्टल बंद होने के कारण किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता पर निर्भर रहने वाले पात्र लाभार्थी अपनी ही हक की राशि के लिए भटकने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि किसान बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटकर थक चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसान सबसे अधिक परेशान हैं। लंबी दूरी तय कर तहसील मुख्यालय पहुंचने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। किसान महेश कुमार ने बताया कि वे पिछले चार महीनों से अपनी तीन से चार अटकी हुई किस्तों के संबंध में सुधार पत्र और सभी जरूरी दस्तावेज जमा करवा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो पुरानी किस्तों का भुगतान हुआ और न ही नई किस्तें जारी हुई हैं। हर बार उन्हें सिर्फ यही जवाब मिलता है कि पोर्टल बंद है, जिससे उनकी उम्मीदें टूटती जा रही हैं।

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इसी तरह किसान चंपालाल ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि उनके मामले में पीएम किसान योजना की किस्तें इस वजह से रोक दी गईं कि लाभार्थी अन्य राज्य का बताया गया। उन्होंने पटवारी की रिपोर्ट और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कराने के बाद भी अब तक कोई लाभ नहीं मिलने की बात कही। चंपालाल ने आरोप लगाया कि कार्यालय में बैठे बाबू घूस की मांग करते हैं और पैसे देने के बाद भी काम नहीं किया जाता। ऐसे में किसानों में व्यवस्था के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

किसानों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। पीएम किसान योजना की किस्तें अटकने के कारण उन्हें राज्य सरकार की सीएम किसान निधि योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। यानी एक समस्या के कारण किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बन गई है, क्योंकि खेती के लिए जरूरी खर्चों का प्रबंधन करना उनके लिए कठिन होता जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर बार-बार शिकायतें करने के बावजूद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही पोर्टल को सुचारू रूप से चालू नहीं किया गया और अटकी हुई किस्तों का भुगतान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं, जबकि किसानों को राहत का इंतजार है।