प्रशिक्षण द्वारा सद्गुणों का अभ्यास करवाता है श्री क्षत्रिय युवक संघ - कारोला
- प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर कलापुरा में तिलक कर 121 स्वयं सेवकों का किया स्वागत
जालोर. श्री क्षत्रिय युवक संघ के प्रशिक्षण में तय दिनचर्या की पालना अनुसार अभ्यास से सद्गुणों और संस्कारों के विकास का प्रशिक्षण दिया जाता है। राजपूत समाज के युवाओं को सामूहिक संस्कारमयी कर्म प्रणाली में ढालने के लिए प्रशिक्षण देते हुए अपने तासीर और इतिहास अनुसार संस्कारों का नियमित अभ्यास करवाया जाता है। भौतिकता के युग में घटते मानवीय मूल्यों और क्षत्रियत्व के गुणों और ईश्वरीय भाव को पुनः स्थापित करने के लिए श्री क्षत्रिय युवक संघ के चार दिवसीय प्राथमिक प्रशिक्षण की शुरुआत के स्वागत कार्यक्रम में यह बात शिविर प्रमुख महेंद्रसिंह कारोला ने क्षत्रिय शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए कही।

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शनिवार से निकटवर्ती कलापुरा में शैतानसिंह के कृषि फार्म पर शिविर प्रमुख कारोला द्वारा राजपूत युवाओं के ललाट पर तिलक और प्रार्थना से शुरू हुए शिविर में रेवत, भागली, कलापुरा, धवला, सियाणा, नारणावास, सरत, बिबलसर, आकोली, नून, सांगाणा, दहिवा, जीवाणा, सुराणा, जाखड़ी, रतनपुर, देवाड़ा, वाड़का गोगा सहित जालौर क्षेत्र के कई गांवों से 121 स्वयंसेवक शौर्य, तेज, धैर्य, दक्षता, युद्ध से मुकाबला, दानशीलता सहित विभिन्न आवश्यक गुणों का विकास के साथ-साथ ईश्वरीय भाव को पुष्ट करने हेतु भाग ले रहे है।
प्रशिक्षण में भूमिका
श्री क्षत्रिय युवक संघ के संभाग प्रमुख अर्जुनसिंह देलदरी ने बताया कि शिविर के दौरान महेंद्रसिंह कारोला, गणपतसिंह भवरानी, नाहरसिंह जाखड़ी, सुमेरसिंह उथमन, ईश्वरसिंह चौरा, जब्बरसिंह लूणा, कल्याणसिंह, अरविंद दिग्विजयसिंह, सहित विभिन्न वरिष्ठ स्वयंसेवक विभिन्न कार्यक्रम प्रभारी के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे है।
प्रबुद्ध जनों का स्नेहमिलन
प्रशिक्षण शिविर में सोमवार को शिविर दिनचर्या और विभिन्न गतिविधियों की कार्य प्रणाली को नजदीक से समझने के लिए स्थानीय राजपूत समाज के प्रबुद्ध जन भाग लेंगे। प्रबुद्ध जनों द्वारा शिविर का अवलोकन और विभिन्न सत्र का निरीक्षण किया जाएगा। भौतिकवाद से दूर एकांत में न्यूनतम सुविधाओं में हो रहे इस अनोखे शिविर की गतिविधियों का देखने हेतु स्थानीय लोगों को शिविर दर्शन हेतु आमंत्रित किया गया है।
राणा सांगा को किया याद - रविवार को शिविर के सायंकालीन प्रार्थना सत्र में राणा सांगा की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में संभाग प्रमुख अर्जुनसिंह देलदरी ने राणा संग्रामसिंह द्वारा अपने जीवन में किए गए अद्भुत संगठनात्मक कार्य पर प्रकाश डालते हुए इन्हें भारतीय इतिहास के ऐसे देदीप्यमान ज्योतिपुंज बताया। जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध अपने समय के समस्त हिंदू राजाओं को ही नहीं बल्कि हसन खा मेवाती व महमूद लोदी जैसे मुस्लिम शासकों को भी शामिल कर एक भारतीय राजाओं के संघ के निर्माण पर जानकारी दी।
शिविर व्यवस्थापक माधोसिंह, जितेंद्रसिंह कलापुरा, नारायणसिंह रेवत द्वारा राजपूत समाज बंधुओ के सहयोग से राजपूत बालकों को अपने स्वभाव अनुसार सद्गुणों को सात्विकता के साथ सतो गुणी बनाने के इस प्रशिक्षण को उपयोगी और सार्थक बता रहे हैं। क्षेत्र के राजपूत समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को शिविर के दौरान प्रातः काल से देर रात्रि तक होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों को निकट से समझने की अपील कर रहे हैं तथा शिविर में होने वाली गतिविधियों को समाज और राष्ट्र के लिए नियमित चलाने की आवश्यकता बता रहे हैं। संघ के चार दिवस की इस पूर्ण आवासीय प्रशिक्षण शिविर का विदाई कार्यक्रम मंगलवार को होगा।