महोत्सव में गूंजे गुरुदेव के जयकारे, मंदिर में नवाया शीश

महोत्सव में गूंजे गुरुदेव के जयकारे, मंदिर में नवाया शीश

जालोर. शहर स्थित स्वामी आत्मानंद सरस्वती गुरु मंदिर में मंदिर प्रतिष्ठा महोत्सव की 15वीं वर्षगांठ एवं ब्रह्मलीन स्वामी मोहनानंद महाराज की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की 12वीं वर्षगांठ श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया। पूरे परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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ट्रस्ट के महामंत्री नैनसिंह सांकरणा ने बताया कि आगामी वर्षगांठ महोत्सव की तैयारियों को लेकर चढ़ावे बोले गए तथा विभिन्न धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा भी तय की गई। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी आयोजन को भव्य रूप देने के लिए समाज के लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल गुरु मंदिर एवं समाधि छत्री पर ध्वजारोहण के साथ हुई। इसके पश्चात संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने मिलकर पुष्पांजलि अर्पित की और महाआरती कर गुरुजनों का स्मरण किया। महोत्सव में गादीपति स्वामी रामानन्द महाराज का सान्निध्य रहा। ट्रस्ट अध्यक्ष दण्डी स्वामी देवानन्द सरस्वती ने धन की उपयोगिता और परोपकार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धन का सही उपयोग समाज सेवा, धर्म के कार्यों और जरूरतमंदों की सहायता में ही है। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज ने अपने संबोधन में बच्चों के संस्कारों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार दें, ताकि वे भविष्य में आदर्श नागरिक बन सकें। कार्यक्रम के अंत में महाप्रसादी का आयोजन हुआ। महोत्सव में जालोर समेत सिरोही, पाली व प्रदेश के अन्य स्थानों से भी श्रद्धालुओं ने शिरकत कर गुरु मंदिर में शीश नवाकर खुशहाली की कामना की।