जोशीमठ में 610 घरों में बड़ी दरारें, मठ को घोषित किया गया भू-धंसाव क्षेत्र, अस्थाई कैंपों में रह रहे 1500 लोग

उत्तराखंड के जोशीमठ को भूस्खलन और धँसाव क्षेत्र घोषित किया गया है तथा दरकते शहर के क्षतिग्रस्त घरों में रह रहे 60 से अधिक परिवारों को अस्थायी राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है। कम से कम 90 और परिवारों को निकाला जाना है।

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DDT Team Verified Media or Organization • 01 Aug, 2026 Chief Editor
Jan 8, 2023 • 10:05 PM  0
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जोशीमठ में 610 घरों में बड़ी दरारें, मठ को घोषित किया गया भू-धंसाव क्षेत्र, अस्थाई कैंपों में रह रहे 1500 लोग
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8 Jan 2023
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जोशीमठ में 610 घरों में बड़ी दरारें, मठ को घोषित किया गया भू-धंसाव क्षेत्र, अस्थाई कैंपों में रह रहे 1500 लोग

डेस्क न्यूज़- उत्तराखंड के जोशीमठ को भूस्खलन और धँसाव क्षेत्र घोषित किया गया है तथा दरकते शहर के क्षतिग्रस्त घरों में रह रहे 60 से अधिक परिवारों को अस्थायी राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। गढ़वाल के आयुक्त सुशील कुमार ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने हिमालयी शहर में चार-पांच स्थानों पर राहत केंद्र स्थापित किए हैं तथा कम से कम 90 और परिवारों को निकाला जाना है।

लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा

इस बीच, चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना नुकसान का आकलन करने के लिए प्रभावित क्षेत्र में घर-घर गए और दरार वाले मकानों में रह रहे लोगों से राहत केंद्रों में जाने की अपील की। जोशीमठ को भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र घोषित किया गया है और प्रभावित घरों में रह रहे 60 से अधिक परिवारों को अस्थायी राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि नुकसान के स्तर को देखते हुए कम से कम 90 और परिवारों को जल्द से जल्द निकालना होगा।

4,500 में से 610 इमारतों में बड़ी दरारें

जोशीमठ में डेरा डाले हुए कुमार जमीनी स्तर पर स्थिति की निगरानी करने वाली एक समिति के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि जोशीमठ में कुल 4,500 इमारतें हैं और इनमें से 610 में बड़ी दरारें आ गई हैं, जिससे वे रहने लायक नहीं रह गई हैं. उन्होंने कहा कि एक सर्वेक्षण चल रहा है और प्रभावित इमारतों की संख्या बढ़ सकती है। कुमार ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र और उन घरों जिनमें पहले दरारें पड़ गई थीं तथा जिनमें हाल में दरारें पड़ी हैं, की वजह से एक बड़ी चापाकार आकृति बन गई है जो 1.5 किलोमीटर के दायरे में फैली हो सकती है।

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अस्थाई कैंपों में रह रहे 1500 लोग

उन्होंने कहा कि जोशीमठ में चार-पांच सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी राहत केंद्र बनाए गए है। कुमार ने कहा कि कुछ और इमारतों, जिनमें कुछ होटल, एक गुरुद्वारा और दो इंटर कॉलेज शामिल हैं, को अस्थायी आश्रयों के रूप में इस्तेमाल करने के लिए अधिगृहीत किया गया है, जिनमें लगभग 1,500 लोग रह सकते हैं। गढ़वाल के आयुक्त ने कहा, ‘जोशीमठ में काफी समय से जमीन धँसने की घटनाएं धीरे-धीरे हो रही हैं, लेकिन पिछले एक हफ्ते में इसकी गति बढ़ गई है और घरों, खेतों तथा सड़कों में बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं।

न्यूज़ सोर्स - न्यूज़ 18

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